जर्मनी में भारतीय महिला का ऑफिस कल्चर: शाम 5:30 बजे सब कुछ खाली
जर्मनी में वर्क-लाइफ बैलेंस का अनोखा उदाहरण
बर्लिन: भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम के निर्धारित घंटों के बाद भी देर रात तक ऑफिस में रहना अक्सर समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इसके विपरीत, जर्मनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने भारतीय पेशेवरों को चौंका दिया है। एक भारतीय महिला ने वहां के कार्यस्थल का दृश्य साझा किया है, जहां शाम 5:30 बजे होते ही पूरा ऑफिस खाली हो जाता है। इस वीडियो को देखकर लोग इसे असली 'वर्क-लाइफ बैलेंस' और अपनी 'ड्रीम जॉब' मान रहे हैं।
सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक का काम
भाग्यश्री नाम की इस महिला ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में बताया कि जर्मनी में उनकी पहली कॉर्पोरेट नौकरी के दौरान यह दृश्य उनके लिए सबसे बड़ा कल्चर शॉक था। वीडियो में दिखाया गया है कि शाम 5:30 बजे ऑफिस की सभी डेस्क और कुर्सियां खाली हो जाती हैं। यहां कर्मचारी सुबह 8 बजे काम पर आते हैं और जैसे ही शाम 5 बजे उनके निर्धारित कार्य घंटे समाप्त होते हैं, सभी अपने लैपटॉप बंद कर घर के लिए निकल जाते हैं। कोई भी बेवजह ऑफिस में देर तक नहीं रुकता, क्योंकि उनका मानना है कि काम के अलावा भी लोगों की अपनी निजी जिंदगी होती है।
देखें VIDEO-
View this post on Instagram
कोई ओवरटाइम का दबाव नहीं
भाग्यश्री ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यहां ओवरटाइम करने का कोई चलन नहीं है। सबसे बड़ी राहत यह है कि काम खत्म होने के बाद या घर पहुंचने पर 'क्विक कॉल' या 'अर्जेंट ईमेल' के नाम पर कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान नहीं किया जाता। कर्मचारी अपने निर्धारित घंटों में पूरी मेहनत और ध्यान से काम करते हैं और समय पूरा होते ही अपने परिवार और शौक के लिए समय निकालते हैं।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और वर्क-लाइफ बैलेंस पर एक नई चर्चा शुरू कर दी। कई यूजर्स ने इसे एक स्वस्थ कार्य संस्कृति बताया। एक यूजर ने कहा कि ऑफिस से समय पर निकलना सामान्य होना चाहिए, न कि इसे कामचोरी समझा जाए। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा कि देर तक बैठना प्रोडक्टिविटी का माप नहीं हो सकता। इस वीडियो ने भारतीय कॉर्पोरेट व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं कि क्या कर्मचारियों से जरूरत से ज्यादा काम कराना ही सफलता है या उन्हें अपनी निजी जिंदगी जीने का पूरा हक मिलना चाहिए।
