जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी
छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सोमवार को अपने आंदोलन को समाप्त करने से इनकार कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और अर्धसैनिक बलों के बीच झड़पें भी हुईं। हालांकि, विश्वविद्यालय ने पहले ही दिन में चुनाव कराने का आदेश जारी किया था।
कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया और सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया। छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। पिछले दो सप्ताह से चल रहे इस आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय ने सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन संचालित करने का निर्णय लिया था।
विश्वविद्यालय ने सोमवार को निर्देश दिया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिन के भीतर चुनाव कराए जाएं। इसके साथ ही, छात्रों को दिए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिए गए।
इसके अलावा, आंदोलन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि ये कदम पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि प्रशासन ने चुनाव कराने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।
बारह दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र रेहान खान ने आरोप लगाया कि प्रशासन प्रदर्शनकारियों को उनकी मांगों से भटकाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारी पहली मांग थी कि छात्र संघ चुनाव को बहाल किया जाए और चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाए। उन्होंने संविधान को मंजूरी देने के लिए समयसीमा तय नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाया।
खान ने कहा, “विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस हमारी मांगों से हमें भटकाने की कोशिश है, लेकिन जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन चाहता है कि प्रदर्शनकारी नोटिस स्वीकार कर अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दें। खान ने कहा कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को बताया था कि 20 दिसंबर तक छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार कर लिया जाएगा। इसके बाद इसे मंजूरी दी जाएगी और 15 दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी।
उन्होंने सवाल किया कि अगर 20 दिसंबर तक संविधान का मसौदा तैयार भी हो जाता है, तो क्या गारंटी है कि प्रशासन इसे मंजूरी देगा? छात्रों ने संविधान को मंजूरी देने के लिए निश्चित समयसीमा तय करने की मांग की थी।
