जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर फर्जी विजिलेंस इंस्पेक्टर गिरफ्तार
जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तारी
जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से खुद को रेलवे विजिलेंस इंस्पेक्टर बताकर अधिकारियों और कर्मचारियों को धोखा दे रहा था। आरोपी का नाम जावेद अली है, और प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वह फर्जी पहचान का उपयोग कर रेलवे के संसाधनों का लाभ उठा रहा था। इस मामले के उजागर होने के बाद रेलवे विभाग और सुरक्षा एजेंसियों ने उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
फर्जी पहचान का दुरुपयोग
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जावेद अली पिछले लगभग छह महीनों से फिरोजपुर मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में खुद को विजिलेंस इंस्पेक्टर बताकर घूम रहा था। उसने इस पहचान का उपयोग करके रेलवे कर्मचारियों पर दबाव डाला और खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर विशेष सुविधाएं प्राप्त कीं। उसकी गतिविधियों ने कई कर्मचारियों को प्रभावित किया, जिससे उन पर आसानी से विश्वास किया गया।
मुफ्त यात्रा का लाभ उठाना
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कई बार एसी कोचों में बिना किराया चुकाए यात्रा करता था। वह रेलवे स्टाफ से विशेष व्यवहार की अपेक्षा करता था और खुद को निरीक्षण पर निकला अधिकारी बताता था। कई मौकों पर वह चेकिंग स्टाफ के साथ ट्रेनों, बुकिंग कार्यालयों और रेलवे परिसरों में भी पहुंच जाता था, जिससे उसके दावों पर किसी को संदेह नहीं होता था।
संदेह के बाद खुलासा
हाल ही में जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन पर आरोपी की गतिविधियां कर्मचारियों को संदिग्ध लगीं। बताया गया है कि वह चेकिंग स्टाफ पर अधिकार जताने की कोशिश कर रहा था। सूचना मिलने पर कमर्शियल मूवमेंट इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और उससे आधिकारिक पहचान पत्र दिखाने को कहा। जब वह वैध आईडी प्रस्तुत नहीं कर सका, तब उसका पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया।
जीआरपी और आरपीएफ की कार्रवाई
फर्जी पहचान की पुष्टि होते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया। उसके खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी पहचान का उपयोग और सरकारी कार्य में बाधा डालने सहित विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि उसने अब तक कितने लोगों को गुमराह किया।
पिछले मामलों का इतिहास
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि जावेद अली का आपराधिक इतिहास पहले से मौजूद है। लगभग एक वर्ष पहले, वह उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद रेलवे स्टेशन पर भी इसी तरह फर्जी रेलवे अधिकारी बनकर लोगों को भ्रमित करने के आरोप में पकड़ा गया था। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक परमदीप सिंह सैनी ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अधिकारी की पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न करें और संदेह होने पर तुरंत रेलवे सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें।
