जून में UPI लेनदेन में 23% की वृद्धि, डिजिटल भुगतान में नया रिकॉर्ड
UPI लेनदेन में वृद्धि
नई दिल्ली: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से लेनदेन जून में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर 22.72 अरब तक पहुंच गया है। इस अवधि में लेनदेन की कुल वैल्यू 20 प्रतिशत बढ़कर 28.92 लाख करोड़ रुपए हो गई है। यह जानकारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों में सामने आई है।
जून में UPI के जरिए औसतन 75.7 करोड़ लेनदेन प्रतिदिन हुए, जबकि प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू 96,405 करोड़ रुपए रही।
मई में UPI लेनदेन की संख्या 23.20 अरब थी, और इनकी वैल्यू 29.90 लाख करोड़ रुपए थी। उस महीने औसतन, UPI ने हर दिन लगभग 74.8 करोड़ लेनदेन प्रोसेस किए, और प्रतिदिन लेनदेन की औसत वैल्यू लगभग 96,465 करोड़ रुपए रही।
दस साल पहले डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम से आम आदमी को जोड़ने के लिए शुरू किया गया UPI अब भारत में रोजाना करोड़ों लेनदेन को सरल बनाता है। वित्त वर्ष 2016-17 में UPI लेनदेन की संख्या केवल 2 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है।
UPI अब यूएई, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरिशस और श्रीलंका सहित आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है, जिससे वैश्विक फिनटेक क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।
हाल ही में ग्रीस में UPI की शुरुआत के बाद, ग्राहक तुरंत, सुरक्षित और आसानी से पैसे भेज सकते हैं, और लेनदेन की लागत पारंपरिक तरीकों की तुलना में काफी कम हो गई है।
पिछले महीने, अमेरिका के पेमेंट सिस्टम के भविष्य पर चर्चा करते हुए, अमेरिकी सांसदों ने भारत के UPI का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि कैसे आधुनिक सार्वजनिक भुगतान बुनियादी ढांचा निजी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे सकता है। इस दौरान फिनटेक कंपनियों ने कांग्रेस से अमेरिका के भुगतान नेटवर्क तक पहुंच से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की मांग की।
भारत के साथ यह तुलना 'हाउस फाइनेंशियल सर्विसेज कमेटी' की 'फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर बनी सब-कमेटी' की सुनवाई के दौरान की गई। सांसदों ने इस बात पर विचार किया कि क्या अमेरिका को अपने नियामक ढांचे को आधुनिक बनाना चाहिए, ताकि योग्य नॉन-बैंक भुगतान कंपनियों को पारंपरिक बैंकिंग बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे फेडरल रिजर्व के भुगतान बुनियादी ढांचे तक पहुंच मिल सके।
