झारखंड में छात्र आंदोलन: राजनीतिक स्वार्थ और असमानता का खेल
छात्रों की समानता का सवाल
जॉर्ज ऑरवेल के प्रसिद्ध उपन्यास 'एनिमल फार्म' में एक दीवार पर लिखा होता है, 'सारे पशु समान हैं'। लेकिन जब सुअरों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया, तो इस नारे को बदलकर 'कुछ पशु ज्यादा समान हैं' कर दिया गया। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 में भी सभी नागरिकों की समानता का उल्लेख है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कुछ नागरिकों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है।
यह सोचने वाली बात है कि जब सभी नागरिक समान हैं, तो विभिन्न घटनाओं में मरने वालों को मिलने वाले मुआवजे में भिन्नता क्यों होती है? एक ही प्रकार की घटनाओं में अलग-अलग राज्यों द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे में भेदभाव क्यों है? यह चर्चा का विषय है।
अब सवाल यह है कि क्या सभी छात्र और युवा समान हैं, या उनकी पहचान इस बात पर निर्भर करती है कि वे कहां से हैं और किसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं? उदाहरण के लिए, जब कांग्रेस विपक्ष में होती है, तो दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन का रुख अलग होता है, जबकि झारखंड में कांग्रेस सत्ता में है, तो वहां का रुख भिन्न होता है।
राहुल गांधी ने जंतर मंतर पर आंदोलन खत्म होने के 10 दिन बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में बयान नहीं देंगे, तब तक संसद की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। उन्होंने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें छात्रों की समस्याओं को उठाया।
हालांकि, झारखंड में जब छात्र पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, तो कांग्रेस का कोई नेता इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहा है। वहां कांग्रेस सरकार का हिस्सा है, लेकिन मंत्री इरफान अंसारी ने छात्रों को भाजपा का एजेंट बताया।
झारखंड में परीक्षा की गड़बड़ी का मामला गंभीर है। एक व्यक्ति, अभय तिवारी, जो सरकारी कर्मचारी था, ने पिछले 12 वर्षों में 13 परीक्षाओं में बैठकर सभी में सफलता प्राप्त की। यह खुलासा हुआ है कि परीक्षा में सही उत्तर देने वालों को कम अंक मिले और गलत उत्तर देने वालों को पास कर दिया गया।
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन के चेयरमैन को इस्तीफा देना पड़ा है, लेकिन कांग्रेस के मंत्री इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि राजनीतिक दलों को छात्रों के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही छात्रों के आंदोलनों को अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर इन दलों को छात्रों की समस्याओं से कोई वास्तविक सरोकार होता, तो वे पेपर लीक और परीक्षा की गड़बड़ी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाते।
