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तमिलनाडु के पेट्रोल पंप संचालकों की चेतावनी: यूपीआई भुगतान बंद कर सकते हैं

तमिलनाडु के पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई लेनदेन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो राज्य के सभी पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि साइबर अपराध की जांच के दौरान उनके बैंक खातों को फ्रीज किया जा रहा है। यदि कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो पेट्रोल पंप संचालक नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
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पेट्रोल पंप संचालकों की चिंताएं

चेन्नई: तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान, विशेषकर यूपीआई लेनदेन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो राज्य के सभी पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध की जांच के दौरान उनके बैंक खातों को फ्रीज कर दिया जाता है, जबकि विवादित लेनदेन में उनकी कोई सीधी भागीदारी नहीं होती।


तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (टीएनपीडीए), जो लगभग 5,000 पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है, ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े बढ़ते जोखिमों के कारण पेट्रोल पंप संचालकों के लिए कैशलेस भुगतान की सुविधा बनाए रखना कठिन होता जा रहा है।


टीएनपीडीए के अध्यक्ष के.पी. मुरली ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों को साइबर अपराध की जांच में घसीटा जा रहा है, जबकि वे केवल ग्राहकों से वैध भुगतान प्राप्त करते हैं।


एसोसिएशन के अनुसार, पेट्रोल पंप संचालकों के पास यह जांचने की कोई व्यवस्था नहीं होती कि यूपीआई या अन्य डिजिटल माध्यम से भुगतान करने वाला ग्राहक कौन है, या उसके द्वारा भेजी गई राशि पहले किसी कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े खाते से गुजरी है या नहीं।


राज्य में डिजिटल भुगतान का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होते हैं, और कई आउटलेट्स की कुल आय का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और अन्य कैशलेस माध्यमों से आता है।


डीलरों का कहना है कि समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी ग्राहक द्वारा किया गया भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच के दायरे में आ जाता है। जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा देते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।


पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि किसी एक संदिग्ध लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को फ्रीज करना उचित नहीं है। इससे उनके दैनिक संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, क्योंकि ईंधन खरीदने, कर्मचारियों का वेतन देने और अन्य आवश्यक खर्चों के लिए बैंकिंग सेवाओं का निर्बाध संचालन आवश्यक है।


एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को सुबह-सुबह पूछताछ के लिए ले जाया गया, जबकि उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि किस लेनदेन की जांच की जा रही है।


टीएनपीडीए का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों को केवल इस कारण संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए कि बाद में किसी लेनदेन पर साइबर अपराध की जांच शुरू हो गई।


एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी सुरक्षा व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे वैध व्यवसायियों के बैंक खातों को बिना पर्याप्त आधार के फ्रीज न किया जाए और उन्हें अनावश्यक पुलिस कार्रवाई का सामना न करना पड़े।


डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यावहारिक समाधान नहीं निकाला गया, तो तमिलनाडु के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान सुविधाएं बंद कर नकद लेनदेन की ओर लौटने के लिए मजबूर हो सकते हैं।