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दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का भारत दौरा: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का विशेष विमान नई दिल्ली में उतरा, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी चल रही है, जो 12 और 13 सितंबर को आयोजित होगा। भारत ने इस बार सम्मेलन की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता रखी है। ब्रिक्स अब 11 देशों का समूह बन चुका है, जो वैश्विक जनसंख्या और जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है। जानें इस सम्मेलन के महत्व और भारत की अध्यक्षता के लक्ष्यों के बारे में।
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दिल्ली में राष्ट्रपति रामाफोसा का स्वागत

जब दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का विशेष विमान नई दिल्ली के पालम एयरबेस पर उतरा, तो यह दृश्य अद्भुत था। जैसे ही राष्ट्रपति सीढ़ियों से नीचे उतरे, भारतीय परंपरा के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया गया। केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने जब हाथ मिलाया, तो राष्ट्रपति के चेहरे पर एक बड़ी मुस्कान थी। हाथ जोड़कर नमस्ते करते हुए रामाफोसा की यह मुस्कान केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच के गहरे और भावनात्मक संबंधों का प्रतीक थी। इस समय दिल्ली सज चुकी है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है।


ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी

दुनिया का ध्यान 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर केंद्रित है, जो 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाला है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष राजनयिक दिल्ली पहुंच रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा अपने उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ यहां आए हैं। युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलूपो भी राजधानी में मौजूद हैं।


भारत की अध्यक्षता और ब्रिक्स का महत्व

भारत ने इस बार शिखर सम्मेलन की थीम को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार निर्धारित किया है, जिसमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता के तहत तीन प्रमुख राजनीतिक स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। पहला, विकासशील देशों के हितों को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता देना। दूसरा, नवाचार और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना। तीसरा, स्थिरता और सतत विकास के लिए ठोस नीतियों का निर्माण करना।


ब्रिक्स का विस्तार और वैश्विक प्रभाव

ब्रिक्स अब केवल पांच देशों का समूह नहीं है। मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई के शामिल होने से यह समूह 11 देशों का एक बड़ा आर्थिक मंच बन चुका है। ब्रिक्स देशों की जनसंख्या दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49.5% है, और यह वैश्विक जीडीपी में 40% से अधिक का योगदान देता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी ब्रिक्स देशों का हिस्सा 26% है।