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दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश ने प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सुझाव दिए और संपन्न वर्ग के वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने गरीबों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है।
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सुप्रीम कोर्ट की चिंता


दिल्ली और एनसीआर में वायु गुणवत्ता में निरंतर गिरावट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अधिकारियों से सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के करीब पहुंच गया है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों पर व्यंग्य करते हुए कहा, "उम्मीद है कि आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।"


प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि अधिकारियों द्वारा लगातार बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।


पराली जलाने पर रोक लगाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में न्याय मित्र के रूप में उपस्थित वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने बताया कि दिल्ली-NCR में सांस लेना रोजाना 30 सिगरेट पीने के बराबर हो गया है। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14 प्रतिशत था। इसके अलावा, प्रदूषण के कारण लोगों की आवाज भी प्रभावित हो रही है।


कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं अब तक समाप्त हो जानी चाहिए थीं। अपराजिता ने बताया कि किसानों को पराली हटाने के लिए मशीनें दी गई हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए ईंधन की आवश्यकता होती है।


जस्टिस बागची ने किसानों से पराली खरीदने के पुराने प्रस्ताव का उल्लेख किया। मुख्य न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि पराली हटाने वाली मशीनें ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए, क्योंकि हर किसान के लिए इन्हें खरीदना संभव नहीं है।


वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर सवाल

मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली-NCR में वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से संपन्न वर्ग के लोगों की गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए।


कोर्ट ने त्योहारों के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों को ध्यान में रखने की आवश्यकता भी बताई। पीठ ने कहा कि केवल प्रतिबंध लगाने और आदेश जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।


गरीबों को प्रदूषण के लिए जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरीब लोग प्रदूषण फैलाने वाले नहीं हैं, बल्कि वे इसका सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि दिवाली का समय उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है, जिनकी आजीविका मौसमी काम और त्योहारों से जुड़ी होती है।


पीठ ने संकेत दिया कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल कमजोर वर्गों पर प्रतिबंध लगाने के बजाय उन लोगों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, जो वास्तव में प्रदूषण बढ़ाने में योगदान देते हैं।