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दिल्ली के शाही इमाम अहमद बुखारी ने अदालत में किया आत्मसमर्पण

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में आत्मसमर्पण किया। उन्हें अदालत ने जमानत प्रदान की है। इस मामले में उनकी बार-बार अनुपस्थिति के कारण वारंट जारी किए गए थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की सुनवाई की तारीख।
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अहमद बुखारी का आत्मसमर्पण


दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत में आत्मसमर्पण किया। यह मामला 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित है। लंबे समय तक अदालत में उपस्थित न होने के कारण उनके खिलाफ वारंट जारी किए गए थे, जिसके बाद उन्होंने अदालत में जाकर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया।


जमानत की स्वीकृति

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कविता अग्रवाल की अदालत ने सुनवाई के दौरान अहमद बुखारी को जमानत दी। अदालत ने उन्हें 20-20 हजार रुपये के दो जमानत बांड जमा कराने की शर्त पर राहत प्रदान की। आत्मसमर्पण के बाद अदालत में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं और मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की गई।


चुनाव प्रचार से जुड़ा मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 10 अप्रैल 2007 को खतौली थाना क्षेत्र में अहमद बुखारी और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उन पर आरोप है कि वे हेलीकॉप्टर से खतौली पहुंचे और बिना आवश्यक प्रशासनिक अनुमति के एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया। पुलिस का कहना है कि यह उस समय लागू आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन था, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।


मुकदमे की धाराएं

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171 और धारा 188 के तहत दर्ज किया गया था। धारा 171 चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपराधों से संबंधित है, जबकि धारा 188 सरकारी अधिकारी के वैध आदेश की अवज्ञा से जुड़ी है। अभियोजन का कहना है कि प्रशासनिक अनुमति के बिना सभा आयोजित करने के कारण यह कार्रवाई की गई।


अनुपस्थिति के कारण वारंट

अभियोजन अधिकारी के अनुसार, अदालत ने कई बार समन और जमानती वारंट जारी किए, लेकिन अहमद बुखारी निर्धारित तिथियों पर अदालत में उपस्थित नहीं हुए। लगातार अनुपस्थिति के कारण अदालत ने सख्त रुख अपनाया और वारंट जारी किए। अंततः, 19 वर्ष पुराने इस मामले में उन्होंने स्वयं अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली और अब मामले की सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।