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दिल्ली के सत्य निकेतन में PG भवन हादसे के बाद की जांच में नए खुलासे

दिल्ली के सत्य निकेतन में एक PG भवन के गिरने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस हादसे में सात लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें PG संचालक और ठेकेदार शामिल हैं। इमारत की संरचना और मालिकाना हक को लेकर भी कई नए तथ्य सामने आए हैं। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और आगे की कार्रवाई क्या होगी।
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दिल्ली में PG भवन का भयानक हादसा


नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को एक PG भवन के गिरने से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह पांच मंजिला इमारत, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निकट स्थित थी, अचानक ढह गई। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का कार्य चल रहा था। बचाव कार्य 27 घंटे तक चला, जिसके परिणामस्वरूप सात लोगों की मृत्यु और पांच अन्य के घायल होने की सूचना मिली। अब पुलिस उन व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही है, जो इस इमारत का संचालन कर रहे थे।


PG संचालकों की गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में महेश ने बताया कि उसने अगस्त 2025 से अपने साझेदार शुंभम त्यागी और सुधांशु को इमारत लीज पर दी थी। दोनों ने इस भवन को 'Hostel Daze' नाम से PG के रूप में संचालित किया। पुलिस ने सुधांशु को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है। इसके साथ ही, मजदूर ठेकेदार सानोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से भी गिरफ्तार किया गया है।


किराए की राशि और गिरफ्तारी

दिल्ली पुलिस के अनुसार, महेश ने बताया कि PG संचालक शुंभम और सुधांशु उसे हर महीने 1.05 लाख रुपये का किराया देते थे। मंगलवार को कासगंज से मजदूर ठेकेदार सानोज को पकड़ा गया और पूछताछ के बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में अब तक कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


इमारत की संरचना पर सवाल

पुलिस ने बताया कि हादसे वाली इमारत के बेसमेंट में लंबे समय से पानी रिसने की समस्या थी। यह क्षेत्र लगभग 55 वर्ग मीटर में फैला हुआ था। हर मंजिल पर दो कमरे थे, जिनमें दो बेड थे। पुलिस ने यह भी बताया कि इमारत में कॉलम और बीम की कमी थी, जिससे उसकी संरचना पर गंभीर सवाल उठते हैं।


मालिकाना हक की जानकारी

इस मामले में पुलिस ने पहले 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया था। प्रारंभ में हरिराम को भवन का मालिक माना गया, लेकिन बाद में दस्तावेजों से पता चला कि इमारत उर्मिला की थी। पुलिस के अनुसार, हरिराम और महेश कथित तौर पर PG का प्रबंधन कर रहे थे।


जर्जर इमारतों पर कार्रवाई

हादसे के बाद, MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक निलंबित कर दिया। इसके अलावा, शहादरा साउथ जोन के लक्ष्मी नगर के F ब्लॉक, पांडव नगर के समसपुर और न्यू अशोक नगर की जर्जर इमारतों को गिराने की कार्रवाई बुधवार को की जाएगी।