दिल्ली चुनाव आयोग ने रेखा गुप्ता की वोटर एंट्री को किया वेरिफाई
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को नोटिस पर चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को SIR प्रक्रिया के दौरान जारी किए गए नोटिस पर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है। आयोग के अनुसार, रेखा गुप्ता की वोटर एंट्री उन तार्किक विसंगतियों में शामिल थी जो SIR के दौरान सामने आई थीं। इसके बाद, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उन्हें नोटिस जारी किया गया और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने फिजिकल फील्ड वेरिफिकेशन किया।
रेखा गुप्ता की वोटर एंट्री की जांच
रेखा गुप्ता शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की रजिस्टर्ड वोटर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में दर्ज जानकारी और पारिवारिक विवरण में विसंगति के कारण उनकी एंट्री को वेरिफिकेशन के लिए चिन्हित किया गया था।
दस्तावेजों की जांच के बाद वेरिफिकेशन
चुनाव आयोग ने बताया कि रेखा गुप्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की गई। फील्ड वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की जांच के बाद उनकी वोटर एंट्री को वेरिफाई कर लिया गया है। आयोग ने कहा कि उनकी एंट्री को शालीमार बाग विधानसभा क्षेत्र की फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए सुरक्षित कर लिया गया है।
नोटिस जारी करने की प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करना SIR के तहत अपनाई जा रही मानक वेरिफिकेशन प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मतलब यह है कि नोटिस मिलने से किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाना तय नहीं होता।
33 लाख मतदाताओं को नोटिस
दिल्ली में चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 33 लाख मतदाताओं को उनकी पात्रता और वोटर रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी सत्यापित करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के नाम भी शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के एक हिस्से में 110 मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया, जिसमें केजरीवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम शामिल हैं।
SIR का उद्देश्य
SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को सत्यापित और अपडेट करना है, ताकि योग्य मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों की जांच की जा सके। चुनाव आयोग मतदाताओं से प्राप्त जानकारी, दस्तावेजों और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर रिकॉर्ड की जांच करता है। आयोग ने कहा है कि प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और अयोग्य व्यक्ति का नाम सूची में शामिल न हो।
