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दिल्ली में CJP नेताओं की मुश्किलें बढ़ीं, मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले को अब क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है। दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को दो दिन बढ़ा दिया गया है। FIR में सरकारी आदेश की अवज्ञा और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और आगे की कार्रवाई क्या होगी।
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CJP नेताओं की न्यायिक हिरासत बढ़ी


दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं, आशुतोष रांका और सौरव दास, के लिए हालात और कठिन हो गए हैं। जंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश के मामले को अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को दो दिन बढ़ाने के बाद लिया गया। अब क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल इस मामले की गहन जांच करेगी।


क्या हैं FIR में आरोप?

कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223ए, 332 और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें सरकारी आदेश की अवज्ञा, अपराध करने के इरादे से अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक साजिश से संबंधित आरोप शामिल हैं। दूसरी ओर, संसद मार्ग थाने में सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने और चोट पहुंचाने से संबंधित दूसरी प्राथमिकी दर्ज की गई है।


न्यायिक हिरासत का विस्तार

सोमवार को आशुतोष और सौरव को मंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उनकी न्यायिक हिरासत को दो दिन के लिए बढ़ा दिया गया। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नेताओं को बुधवार को फिर से मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा। इससे पहले, 13 अक्टूबर को उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के मामले में पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।


प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी

पुलिस के अनुसार, दोनों नेताओं को अन्य CJP कार्यकर्ताओं के साथ जंतर-मंतर में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए। पार्टी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जिसका आरोप है कि इससे मतदाता सूची में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।


मजिस्ट्रेट को धमकी मिलने का मामला

रविवार को दिल्ली पुलिस ने मजिस्ट्रेट को कथित धमकी दिए जाने के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की। CJP का आरोप है कि उनके सह-संयोजकों की रिहाई में जानबूझकर देरी की जा रही है और जमानत के लिए दी गई चार जमानतदारियों को बिना स्पष्ट कारण बताए खारिज कर दिया गया। पार्टी की कानूनी प्रकोष्ठ प्रमुख रत्ना सिंह के अनुसार, विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने अदालत को धमकी भरा संदेश मिलने की जानकारी दी थी।