दिल्ली में छात्र आंदोलन: जंतर-मंतर पर भीड़ में कमी और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति
छात्र आंदोलन का बदलता माहौल
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का दृश्य शुक्रवार को कुछ अलग नजर आया। प्रदर्शनकारियों की संख्या में पहले की तुलना में कमी आई है। अनशन खत्म होने, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू होने और सुरक्षा इंतजामों के चलते धरना स्थल का माहौल शांत रहा।
प्रदर्शन स्थल पर घटती भीड़
शुक्रवार को जंतर-मंतर, टॉलस्टॉय रोड और संसद मार्ग के आसपास प्रदर्शनकारियों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई। एक दिन पहले की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम लोग धरना स्थल पर पहुंचे। बताया गया है कि मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद आंदोलन की दिशा में बदलाव आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप और सरकार तथा सीजेपी के बीच बातचीत ने भी प्रदर्शनकारियों के रुख को प्रभावित किया। मेट्रो सेवाओं पर लगी पाबंदियों और अन्य सुरक्षा इंतजामों का भी असर देखा गया।
आंदोलन जारी रखने की अपील
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से समर्थकों से आंदोलन को जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी समय प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, इसलिए सभी को डटे रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में अधिक लोगों के जुड़ने की संभावना है। स्वयंसेवक भी लोगों से धरना स्थल पर बने रहने का आग्रह करते रहे, लेकिन इसका प्रभाव सीमित नजर आया।
सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति
दिन के दौरान संसद मार्ग पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने संयम बनाए रखते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया। किसी बड़े टकराव की सूचना नहीं मिली। इसी दौरान कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में पहुंचे, जिन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। विभिन्न राजनीतिक दलों के कुछ अन्य प्रतिनिधि भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और आंदोलन के प्रति समर्थन जताया।
देशव्यापी आह्वान का सीमित प्रभाव
सीजेपी ने शुक्रवार को देशभर में जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी। हालांकि, अधिकांश राज्यों से मिली जानकारी के अनुसार इस आह्वान का व्यापक असर नहीं देखा गया। कुछ चुनिंदा शहरों में ही प्रदर्शन हुए, जबकि कई स्थानों पर सामान्य स्थिति बनी रही। फिलहाल आंदोलन का केंद्र जंतर-मंतर बना हुआ है और आगे की रणनीति सरकार तथा प्रदर्शनकारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।
