Newzfatafatlogo

दिल्ली में तिरंगा मार्च: सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, CJP की मांगें

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है, जबकि दो नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। जानें इस मार्च के पीछे की वजहें और नई दिल्ली में संभावित टकराव की स्थिति।
 | 

दिल्ली में सियासी हलचल

नई दिल्ली। आज राजधानी दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियाँ एक बार फिर तेज हो गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 'लहरा दो तिरंगा' मार्च का आयोजन करने का निर्णय लिया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय ध्वज के साथ कनॉट प्लेस पहुंचें।


सुरक्षा व्यवस्था

मार्च की शुरुआत से पहले ही दिल्ली में सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, छह हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की कंपनियों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और CCTV कैमरों के माध्यम से निगरानी बढ़ा दी गई है।


CJP की मांगें

इस मार्च का उद्देश्य क्या है?

CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग ने किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष में काम करने के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन योग्य मतदाताओं के नाम हट गए हैं, वे पुनः पंजीकरण करा सकते हैं।


न्यायिक हिरासत

इस प्रदर्शन का एक अन्य कारण CJP के दो नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जाना है। उन पर प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर में प्रवेश करने और नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है।


मार्च की चुनौतियाँ

इस मार्च के सामने सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर के लिए बंद रखने का आदेश दिया है। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस ने BNSS की धारा 163 के तहत इलाके में प्रतिबंध लागू किए हैं। पुलिस ने यह भी कहा है कि सीमित संख्या में लोगों को किसी अन्य स्थान पर तिरंगा मार्च की अनुमति दी जा सकती है।


दिल्ली हाईकोर्ट का निर्णय

दिल्ली हाईकोर्ट ने मार्च को रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया था, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदर्शन को सभी आवश्यक अनुमतियां मिल गई हैं। इसका अर्थ है कि आज दिल्ली में तिरंगे, वोटर लिस्ट और विरोध के अधिकार को लेकर एक बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।


आगे का रास्ता

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि CJP का 'लहरा दो तिरंगा' मार्च किस दिशा में आगे बढ़ता है।