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दिल्ली में बारापुला फेज-3 कॉरिडोर का उद्घाटन, यातायात में सुधार की उम्मीद

दिल्ली में बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया। यह परियोजना पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार को सराय काले खां से जोड़ती है, जिससे यातायात में सुधार की उम्मीद है। उद्घाटन के बाद, यात्रियों को सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्रा का समय कम होगा। इस परियोजना की लागत में वृद्धि और देरी के बावजूद, यह दिल्ली के ट्रैफिक दबाव को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।
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दिल्ली में बारापुला फेज-3 का उद्घाटन


दिल्ली में बारापुला फेज-3 का उद्घाटन: दिल्ली में लंबे समय से प्रतीक्षित बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर अब आम जनता के लिए खुल गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस परियोजना का उद्घाटन मंगलवार को किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा भी उपस्थित थे। इस कॉरिडोर के शुरू होने से पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां और दक्षिण दिल्ली के बीच यात्रा करने वाले लोगों को सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।


मयूर विहार से सराय काले खां तक कनेक्टिविटी

बारापुला फेज-3 का निर्माण सराय काले खां से मयूर विहार फेज-1 तक बारापुला नाले के ऊपर एक एलिवेटेड रोड के रूप में किया गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सीधी और सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी प्रदान करना है। यह कॉरिडोर मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़ता है, जिससे मयूर विहार से आने वाले वाहन सराय काले खां के रास्ते दक्षिण दिल्ली की ओर जा सकेंगे। इससे सराय काले खां, रिंग रोड, DND फ्लाईवे और NH-24 जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की संभावना है।


नोएडा और दक्षिण दिल्ली के यात्रियों को फायदा

बारापुला फेज-3 को विशेष रूप से पूर्वी दिल्ली और नोएडा से दक्षिण दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मयूर विहार से AIIMS की दिशा में यात्रा का समय लगभग 15 मिनट तक हो सकता है। नए कॉरिडोर के माध्यम से वाहन चालकों को कई सिग्नलों से बचने का अवसर मिलेगा, जिससे उन प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक की समस्या कम करने का लक्ष्य है।


2014 में मंजूरी, 2015 में शुरू हुआ निर्माण

बारापुला फेज-3 परियोजना की प्रशासनिक मंजूरी दिसंबर 2014 में दी गई थी और इसका निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ। इसे प्रारंभ में 2017 तक पूरा किया जाना था, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पेड़ काटने की अनुमति, यमुना क्षेत्र में निर्माण से जुड़ी चुनौतियों, कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से परियोजना में देरी हुई। दिल्ली सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, परियोजना की प्रारंभिक लागत लगभग ₹1,260.63 करोड़ थी, जो बाद में बढ़कर ₹1,635.03 करोड़ हो गई।


एक दशक की देरी के बाद पूरा हुआ प्रोजेक्ट

इस परियोजना को कई बार नई समयसीमा दी गई। जनवरी 2026 में PWD ने अतिरिक्त समय और संशोधित लागत की जानकारी दी थी। हालांकि, जून 2026 को निर्धारित अंतिम समयसीमा भी पूरी नहीं हो सकी। जुलाई में अधिकारियों ने बताया कि मुख्य निर्माण पूरा हो चुका है और कुछ फिनिशिंग कार्य बाकी हैं। इस परियोजना में देरी और लागत बढ़ने के कारण दिल्ली में प्रशासनिक जांच भी हुई है।


साइकिल और पैदल यात्रियों के लिए प्रावधान

इस परियोजना में वाहन यातायात के साथ-साथ पैदल और साइकिल से आने-जाने वालों के लिए भी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। कॉरिडोर के यमुना पार हिस्से में विशेष संरचनात्मक डिजाइन का उपयोग किया गया है। इसका उद्देश्य केवल वाहनों की आवाजाही को तेज करना नहीं, बल्कि क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना भी है। उद्घाटन के मद्देनजर, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सराय काले खां, महारानी बाग और आश्रम चौक के आसपास यातायात को लेकर एडवाइजरी जारी की थी।