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दिल्ली में यमुना के प्रदूषित पानी से उगाई गई सब्जियों का स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

एक नए अध्ययन ने दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषित पानी से उगाई गई सब्जियों के स्वास्थ्य पर गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। शोध में पाया गया है कि बिना उपचारित जल से उगाई गई सब्जियों में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि यमुना के प्रदूषण में दिल्ली का योगदान 70 से 80 प्रतिशत है। सब्जियों में निकेल, क्रोमियम, और अन्य जहरीली धातुओं की मात्रा मानकों से कहीं अधिक पाई गई है। शोधकर्ताओं ने सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश की है।
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यमुना नदी के प्रदूषण से सब्जियों पर खतरा


एक हालिया अध्ययन, जो 'एनर्जी नेक्सस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, ने दिल्ली में यमुना नदी के मैदानी क्षेत्रों में उगाई जाने वाली सब्जियों के स्वास्थ्य पर गंभीर चिंताओं को उजागर किया है। दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर दीनाबंधु साहू के नेतृत्व में किए गए इस शोध में पाया गया है कि बिना उपचारित यमुना जल से उगाई गई सब्जियों का सेवन कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।


किसान और यमुना का प्रदूषित पानी

अध्ययन में यह बताया गया है कि यमुना नदी के प्रदूषण में दिल्ली का योगदान लगभग 70 से 80 प्रतिशत है। इस गंभीर स्थिति के बावजूद, दिल्ली के आसपास के किसान फसलों और सब्जियों की सिंचाई के लिए इसी जहरीले पानी का उपयोग करने को मजबूर हैं, जिससे फसलों में हानिकारक तत्वों का समावेश हो रहा है।


खतरनाक धातुओं का पता

जांच के दौरान, सब्जियों में निकेल, क्रोमियम, कैडमियम और सीसा जैसी जहरीली भारी धातुएं खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा निर्धारित मानकों से काफी अधिक पाई गईं। अध्ययन के अनुसार, पालक और प्याज में निकेल का स्तर क्रमशः 97 और 65 गुना अधिक था, जबकि सरसों की पत्तियों में क्रोमियम का स्तर 22 गुना ज्यादा पाया गया।


सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम

शोधकर्ताओं ने मिट्टी और फसलों की नियमित निगरानी करने और प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण लागू करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, उन्होंने किसानों को ऐसी फसलें उगाने की सलाह दी है जो मिट्टी से जहरीली धातुओं को कम मात्रा में अवशोषित करती हैं, ताकि आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।