दिल्ली हाई कोर्ट ने हॉस्टल सुविधाओं पर जनहित याचिका की सुनवाई से किया इनकार
दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में हॉस्टल सुविधाओं की मांग
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने 8 सितंबर, मंगलवार को दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कॉलेजों में छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश 'देवेंद्र कुमार उपाध्याय' और न्यायमूर्ति 'तेजस कारिया' की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई अंतरिम आदेश तुरंत जारी नहीं किया जा सकता।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
याचिकाकर्ता के वकील 'विमल त्यागी' ने मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, जिस पर पीठ ने कहा, "क्या इस तरह का निर्देश अंतरिम आदेश के माध्यम से दिया जा सकता है? अपनी याचिका को विधिवत दाखिल करें, यह कल यानी बुधवार को स्वतः सूचीबद्ध हो जाएगी। बेवजह अपना समय बर्बाद क्यों कर रहे हैं?" इसके अलावा, अदालत ने यह भी बताया कि इसी विषय पर एक अन्य जनहित याचिका पर सोमवार को पहले ही सुनवाई हो चुकी है। वकील ने दलील दी कि उनकी याचिका में मुआवजे की मांग नहीं है, बल्कि हर कॉलेज में हॉस्टल की अनिवार्यता की मांग की गई है, फिर भी अदालत ने प्रक्रिया के तहत बुधवार को सुनवाई का निर्णय लिया।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ा विवाद
यह याचिका दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में एक 5-मंजिला लड़कों के पीजी भवन के गिरने के बाद दायर की गई थी, जिसमें 7 लोगों की, मुख्य रूप से छात्रों की, मौत हो गई थी। इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए हाई कोर्ट ने सोमवार को MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि बाहर से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय में पर्याप्त हॉस्टल नहीं हैं, जिससे वे असुरक्षित निजी पीजी में रहने को मजबूर होते हैं। इसके साथ ही अदालत ने MCD को एक सप्ताह के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र के सभी पीजी हॉस्टलों का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
