Newzfatafatlogo

दिल्ली हाईकोर्ट ने लोहार बस्ती में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने से किया इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने लोहार बस्ती में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि फुटपाथ का उपयोग केवल पैदल चलने वालों के लिए होना चाहिए और अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस फैसले के बाद प्रभावित लोग पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन न्यायालय ने फिलहाल कोई राहत नहीं दी। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की वजहें और आगे की संभावनाएं।
 | 

दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने आजादपुर के लोहार बस्ती में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फुटपाथ का उपयोग केवल पैदल चलने वालों के लिए किया जाना चाहिए और उन पर किसी भी प्रकार के अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह आदेश जस्टिस जसमीत सिंह ने लोहार बस्ती लाल बाग आजादपुर विकास समिति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।


बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से कोर्ट का इनकार


बस्ती को हटाने के लिए 7 अगस्त को नोटिस जारी किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इस नोटिस को चुनौती देते हुए 27 अगस्त को प्रस्तावित तोड़फोड़ पर रोक लगाने की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई से पहले दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (डूसिब) द्वारा पुनर्वास से संबंधित सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।


उच्च न्यायालय ने मामले के दस्तावेजों और प्रस्तुत तस्वीरों का अवलोकन किया। न्यायालय ने पाया कि संबंधित ढांचे फुटपाथ और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर स्थित हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, ये निर्माण सार्वजनिक भूमि, बरसाती पानी की नालियों और जीटीके रोड पर पीडब्ल्यूडी के राइट ऑफ वे पर भी अतिक्रमण कर रहे हैं। न्यायालय ने यह भी देखा कि इन सार्वजनिक स्थानों का उपयोग कुछ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिसमें लोहे के बर्तन बेचने वाली दुकानें शामिल थीं।


न्यायमूर्ति ने कहा कि फुटपाथ को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि ये आम नागरिकों के लिए आवश्यक हैं। अतिक्रमण से पैदल यात्रियों को कठिनाई होती है और सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होती हैं। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि फुटपाथ पर बने अवैध निर्माणों को हटाना आवश्यक है।


यह निर्णय दिल्ली में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रभावित लोग पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन न्यायालय ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। प्रशासन अब नोटिस के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है। लोहार बस्ती के निवासी इस निर्णय से चिंतित हैं और आगे कानूनी विकल्पों की तलाश कर सकते हैं।