दिव्यांगों के लिए फास्टैग नियमों में बदलाव: अब मिलेगी लंबी छूट
फास्टैग नियमों में नया बदलाव
दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक सकारात्मक समाचार सामने आया है। सरकार ने टोल पर छूट देने वाले फास्टैग के नियमों में संशोधन किया है, जिससे बार-बार कागज बनवाने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। सड़क परिवहन मंत्रालय ने जानकारी दी है कि यह नया नियम 2 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में लागू होगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से सभी के लिए एक समान नियम लागू होगा, जिससे लोगों को कागजी कार्यवाही से राहत मिलेगी। पहले दिव्यांग व्यक्तियों को हर साल अपना छूट वाला फास्टैग फिर से बनवाना पड़ता था, जिससे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
दिव्यांगता के प्रमाण पत्र से मिलेगी छूट
नए नियम के अनुसार, विशेष रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए बनाए गए वाहनों या दिव्यांग के नाम पर रजिस्टर वाहनों को दिव्यांगता के स्तर के अनुसार फास्टैग प्रदान किया जाएगा। इसके लिए दिव्यांगता का सर्टिफिकेट या यूडीआईडी कार्ड प्रस्तुत करना होगा। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
फास्टैग की वैधता में वृद्धि
नए नियम के तहत, जिन व्यक्तियों की दिव्यांगता 70 से 100 प्रतिशत है, उनके फास्टैग की वैधता 5 साल होगी। वहीं, जिनकी दिव्यांगता 40 से 70 प्रतिशत के बीच है, उनके फास्टैग की वैधता 3 साल होगी। निर्धारित समय के बाद, लोग नियमों के अनुसार फिर से फास्टैग बनवा सकेंगे।
सरकार का दृष्टिकोण
सरकार ने बताया है कि इस नए नियम से टोल की प्रक्रिया दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सरल और स्पष्ट होगी। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छूट केवल उन्हीं लोगों को मिले, जो वास्तव में इसके हकदार हैं, जिससे गलत तरीके से छूट लेने की घटनाएं कम होंगी।
फास्टैग का वार्षिक पास
सरकार ने यह भी बताया कि पिछले साल 15 अगस्त को शुरू किया गया फास्टैग का वार्षिक पास अब एक करोड़ से अधिक लोगों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। यह पास केवल निजी वाहनों के लिए है और इसे राजमार्ग यात्रा ऐप के माध्यम से केवल 3,075 रुपए में प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद, एक साल तक या 200 बार टोल पार करने तक फास्टैग में पैसे डालने की आवश्यकता नहीं होती।
