नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हिंसा: घुसपैठियों के खिलाफ हिंदू संगठनों की मांगें
नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हुई हिंसा
हाल ही में नेपाल में कावड़ यात्रा के दौरान हुई हिंसा ने कई क्षेत्रों में तनाव पैदा कर दिया। यह बवाल तब शुरू हुआ जब कावड़ियों पर पत्थरबाजी की गई, जिसके परिणामस्वरूप 24 वर्षीय एक हिंदू युवक की गोली लगने से मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। कई स्थानों पर कर्फ्यू लागू करना पड़ा। हालांकि अब हालात कुछ सामान्य होते दिख रहे हैं, लेकिन हिंदू संगठन अभी भी आक्रोशित हैं। उनका आरोप है कि रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठिए नेपाल की जनसंख्या संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। सुनसुरी जिले के कप्तानगंज क्षेत्र में मुस्लिम आबादी लगभग 13% है, जबकि नेपाल की कुल मुस्लिम जनसंख्या केवल 5% है।
घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, घुसपैठियों की संख्या में वृद्धि के कारण अब उन्हें खदेड़ने की योजना बनाई जा रही है। हिंदू संगठनों ने नेपाल सरकार को 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा है, जिसमें रोहिंग्या बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर करने की मांग की गई है। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की भी मांग की गई है। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम लोग अपने सामान के साथ नेपाल से भागते हुए दिखाई दे रहे हैं।
डेमोग्राफी में बदलाव और धार्मिक तनाव
नेपाल में मुस्लिम जनसंख्या का बढ़ना स्थानीय हिंदू समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। पहले केवल तराई क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी बढ़ रही थी, लेकिन अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। राजा के शासन के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में मुसलमानों की संख्या नगण्य थी, लेकिन अब वहां धार्मिक आयोजनों का आयोजन हो रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये आयोजन घुसपैठ के लिए हो रहे हैं। इसके अलावा, मदरसों और मस्जिदों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। 2020 में नेपाल में 911 रजिस्टर्ड मदरसे थे, जो 2025 तक 1200 से अधिक हो जाएंगे।
