नेपाल में बाढ़ के बाद मानसिक स्वास्थ्य संकट: सरकार की पहल
बाढ़ के बाद का संकट
काठमांडू, 1 सितंबर: नेपाल में बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन लोगों के दिलों में अभी भी तबाही का डर बना हुआ है। बच्चे रात में डरकर जाग जाते हैं और रोते हैं कि बाढ़ फिर से आ गई है। कई वयस्क भी चिंता और भय से जूझ रहे हैं, जबकि बाढ़ में बिछड़े परिवार अपने प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल में न केवल भौतिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि गहरा मानसिक आघात भी छोड़ा है। पिछले एक दशक में आई इस सबसे भीषण बाढ़ के कारण मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अब उस संकट के संकेत देख रहे हैं, जो भौतिक तबाही से कम स्पष्ट है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या 900 से अधिक हो चुकी है और लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं।
सरकार की पहल
अपनों को खोने, घर छोड़ने और भविष्य की अनिश्चितता का मानसिक बोझ हजारों लोगों पर बढ़ता जा रहा है। इसे देखते हुए, सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। अधिकारियों के अनुसार, रसुवा और नुवाकोट जिलों में लगभग 50 मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों को तैनात किया गया है।
मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता
बागमती प्रांत में 64 प्रशिक्षित परामर्शदाता भी जरूरत पड़ने पर तत्काल सेवा देने के लिए तैयार हैं। अधिकारियों का मानना है कि प्रभावित लोगों को लंबे समय तक मनोसामाजिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है। यह सहायता तब बढ़ाई जा रही है जब बाढ़ से 11,000 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और कई गांव, घर, सड़कें और पुल तबाह हो गए हैं।
प्रारंभिक मनोवैज्ञानिक उपचार
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आपदा के तुरंत बाद मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार की शुरुआत की जा रही है। इसका उद्देश्य उन लोगों को मानसिक और भावनात्मक सहारा देना है, जो अचानक आई आपदा के सदमे से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा विभाग की वरिष्ठ सलाहकार पोमावती थापा ने बताया कि रसुवा और नुवाकोट में तैनात 50 मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों में से लगभग 10 सीधे मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार दे रहे हैं।
सहायता के लिए समन्वय
रसुवा के दूरदराज इलाके उत्तरगया में चार सदस्यों की एक टीम भेजी गई है। विभाग ने मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की योजना बनाई है और उन क्षेत्रों में उनकी सेवाएं उपलब्ध कराने का समन्वय किया जा रहा है, जहां इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है। थापा के अनुसार, अधिकारियों का ध्यान पहले जमीन पर हालात का आकलन करने और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक उपचार पर था।
सामाजिक संगठनों का सहयोग
इस अभियान में नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी, मानसिक स्वास्थ्य एवं काउंसिलिंग केंद्र नेपाल और कई अन्य गैर-सरकारी संगठन भी शामिल हैं। सरकार ने फोन के जरिए मनोसामाजिक सहायता की सुविधा भी बढ़ाई है। स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता समीर कुमार अधिकारी ने बताया कि 1115 हेल्पलाइन पर सामान्य स्वास्थ्य संबंधी परामर्श उपलब्ध है।
विशेष मनोसामाजिक सेवाएं
बाढ़ के बाद बढ़ी जरूरत को देखते हुए इस हेल्पलाइन पर काम करने वाले कर्मचारियों को मनोसामाजिक सहायता देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। 1166 के जरिए विशेष मनोसामाजिक सेवा उपलब्ध है, जिसे पाटन मानसिक अस्पताल से संचालित किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, देश के किसी भी हिस्से से आने वाले फोन को इस सेवा से जोड़ा जाता है।
बचाव और पुनर्वास
फिलहाल, मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों का अधिकांश समय बिछड़े परिवारों को फिर से मिलाने, पीड़ितों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और उन्हें आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान करने में व्यतीत हो रहा है। औपचारिक काउंसलिंग अभी प्राथमिकता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस आपदा का असली मानसिक प्रभाव तब अधिक स्पष्ट होगा, जब तत्काल संकट समाप्त हो जाएगा।
लोगों की प्राथमिकताएं
अभी लोगों का ध्यान जीवित रहने, अपनों को खोजने और बुनियादी जरूरतें पूरी करने पर है। बोहरा के अनुसार, बाढ़ से बचे लोग केवल डर और अपनों को खोने के दुख से ही नहीं जूझ रहे, बल्कि उन्होंने अपने समुदाय और सामाजिक दुनिया को भी खो दिया है। मानसिक स्वास्थ्य कर्मियों का मुख्य लक्ष्य बाढ़ से बचे लोगों को सुरक्षित रखना और उन्हें मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता प्रदान करना है।
