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नेपाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ी, राहत कार्य जारी

नेपाल में आई बाढ़ के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है, जहां मरने वालों की संख्या 800 से अधिक हो गई है और 2500 से ज्यादा लोग लापता हैं। पनबिजली परियोजनाओं में काम करने वाले कई लोग सुरंगों में फंसे हुए हैं, जिनका बचाव कार्य जारी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने अब तक 149 भारतीयों को सुरक्षित निकाला है। राहत कार्य में प्रगति हो रही है, लेकिन बाढ़ के कारण स्थिति अभी भी चिंताजनक है।
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नेपाल में बाढ़ का संकट


नई दिल्ली। नेपाल में अचानक आई बाढ़ के पांच दिन बाद भी राहत और बचाव कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। मरने वालों की संख्या अब तक 800 से अधिक हो गई है, जबकि लापता लोगों की संख्या 2500 से ज्यादा है। पनबिजली परियोजनाओं में कार्यरत लगभग 900 लोग विभिन्न सुरंगों में फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने का प्रयास जारी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पनबिजली परियोजनाओं के 898 कर्मचारी सुरंगों में फंसे हैं, जबकि 361 को सुरक्षित निकाला जा चुका है।


बचाव कार्य में प्रगति

रविवार को त्रिशूली-3ए पनबिजली परियोजना की सुरंग में बचाव कार्य में कुछ सफलता मिली। बचावकर्मी मशीनों की सहायता से मिट्टी और गाद को हटा रहे हैं। सुरंग में छह इंच का छेद कर पाइप के माध्यम से हवा पहुंचाई जा रही है। विशेषज्ञों की टीम इस छेद को बड़ा करने की योजना बना रही है ताकि बचाव दल सुरंग के अंदर जाकर लोगों की खोज कर सकें। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुरंग में फंसे कितने लोग जीवित हैं।


आपदा का कारण

यह ध्यान देने योग्य है कि 26 अगस्त को ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील के टूटने से नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बाढ़ आई थी। इस आपदा में नेपाल में अब तक 788 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, तिब्बत में मरने वालों की संख्या 16 तक पहुंच गई है, लेकिन वहां से अधिक जानकारी नहीं मिल रही है क्योंकि चीन जानकारी को छिपा रहा है।


भारतीय नागरिकों की स्थिति

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के प्रयासों पर रविवार को शाम साढ़े पांच बजे तक का अपडेट जारी किया। अब तक 149 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बचाए गए भारतीयों की सूची सोशल मीडिया पर साझा की।


जल स्तर में कमी

नेपाल के लिए एक सकारात्मक खबर यह है कि नेपाल और चीन की सीमा के पास बाढ़ के बाद बनी झील का अधिकांश पानी प्राकृतिक तरीके से निकल गया है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने रविवार को कहा कि इससे निचले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ आने का खतरा कम हो गया है। यह झील पिछले बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनी थी। लांगटांग री पर्वत क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था, जिससे नदी का प्रवाह रुक गया और पानी जमा होकर झील बन गई। अब पानी निकल जाने से नेपाल के निचले हिस्से में बाढ़ का खतरा टल गया है।