पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का नया आदेश: अदालतों में जमा धन को फिक्स्ड डिपाजिट में रखा जाएगा
महत्वपूर्ण निर्देश जारी
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अदालतों में निष्पादन कार्यवाही के दौरान जमा होने वाली धनराशि के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब ऐसी राशि को निष्क्रिय नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे तुरंत किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली सावधि जमा के रूप में रखा जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भी पक्ष को आर्थिक नुकसान न हो।
आदेश का दायरा
यह आदेश पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की सभी निष्पादन अदालतों पर लागू होगा। उच्च न्यायालय ने यह भी बताया कि अदालत में जमा धन लंबे समय तक बिना ब्याज के पड़ा रहने से संबंधित पक्षों को वित्तीय नुकसान हो सकता है। इसलिए, अब प्रत्येक ऐसी राशि को सुरक्षित तरीके से राष्ट्रीयकृत बैंक में फिक्स्ड डिपाजिट के रूप में रखा जाएगा।
निर्णय की सुनवाई
यह निर्णय जस्टिस पंकज जैन द्वारा धन डिक्री से जुड़े एक निष्पादन मामले में दायर सिविल पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान सुनाया गया। यह याचिका सफीदों के अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश द्वारा 11 मार्च 2025 को पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। मामले में याचिकाकर्ता डिक्री धारक थे।
अदालत के निर्देश
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि अदालतों में जमा धनराशि को निष्क्रिय रखने के बजाय उसे तुरंत राष्ट्रीयकृत बैंक में ब्याज वाली फिक्स्ड डिपाजिट में निवेश किया जाना चाहिए। इससे संबंधित राशि सुरक्षित भी रहेगी और उस पर ब्याज भी मिलता रहेगा।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित पात्र पक्ष के नाम पर फिक्स्ड डिपाजिट हस्तांतरित की जाएगी। यदि पात्र पक्ष चाहे तो फिक्स्ड डिपाजिट पर मिलने वाले ब्याज को समय समय पर निकाल सकता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक धनराशि पर आर्थिक लाभ मिलता रहेगा।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय उन मामलों में विशेष रूप से लाभकारी साबित होगा, जिनमें अदालतों में बड़ी धनराशि लंबे समय तक जमा रहती है। अब उस राशि पर ब्याज मिलने से संबंधित पक्षों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा और अदालतों में जमा धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
