पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में डॉक्टरों पर आपराधिक कार्यवाही नहीं
चंडीगढ़ में हाई कोर्ट का निर्णय
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल किसी मरीज की मृत्यु या उपचार के अपेक्षित परिणाम न मिलने के आधार पर डॉक्टरों को आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में स्वतंत्र और सक्षम चिकित्सा विशेषज्ञ की राय आवश्यक है।
मामला तरनतारन जिले से संबंधित
यह मामला पंजाब के तरनतारन जिले से जुड़ा है, जहां एक महिला की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई। मृतका के पति ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था, जहां प्रारंभ में सामान्य प्रसव का आश्वासन दिया गया, लेकिन बाद में ऑपरेशन के जरिए जुड़वां बच्चियों का जन्म हुआ। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
हाई कोर्ट ने समन आदेश को रद्द किया
न्यायमूर्ति मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध चिकित्सा साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन नहीं किया और विशेषज्ञ चिकित्सकीय राय प्राप्त किए बिना ही डॉक्टरों को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब कर लिया, जो कानूनन उचित नहीं था।
जांच रिपोर्ट में लापरवाही नहीं मिली
सुनवाई के दौरान डॉक्टरों ने दलील दी कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं है, जिससे उनकी लापरवाही साबित होती हो। मामले की जांच करने वाली विशेषज्ञ टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में डॉक्टरों को दोषमुक्त बताया था। इसके बावजूद निचली अदालत ने केवल मृत्यु होने के आधार पर समन जारी कर दिया था।
प्रतिष्ठा पर पड़ता है गहरा असर
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू होने का प्रभाव केवल कानूनी नहीं बल्कि पेशेवर और सामाजिक भी होता है। गिरफ्तारी की आशंका, जमानत की प्रक्रिया और प्रतिष्ठा को होने वाला नुकसान लंबे समय तक असर डाल सकता है। यदि बाद में डॉक्टर निर्दोष साबित भी हो जाए, तब भी उसकी साख को हुई क्षति की भरपाई संभव नहीं होती।
