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निर्मला सीतारमण की जी20 बैठक में भागीदारी, वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर चर्चा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर चर्चा की और प्रमुख निवेशकों के साथ बातचीत की। सीतारमण ने 3एम के सीईओ से भी मुलाकात की, जिसमें भारत में विनिर्माण और प्रौद्योगिकी विकास पर जोर दिया गया। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या चर्चा हुई।
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सीतारमण की अमेरिका यात्रा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका के नॉर्थ कैरोलाइना के एशविल पहुंच गई हैं। इस बैठक में पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्षों के बीच वैश्विक आर्थिक विकास पर मुख्य रूप से चर्चा की जाएगी। सीतारमण अपनी नौ दिवसीय यात्रा के तहत 29 अगस्त से 2 सितंबर तक अमेरिका में हैं।


स्वागत और गोलमेज सम्मेलन

भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने रविवार को साउथ कैरोलाइना के ग्रीनविल-स्पार्टनबर्ग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। सीतारमण शिकागो से एशविल पहुंचीं, जो वाशिंगटन से लगभग 760 किलोमीटर दूर है। शिकागो में, उन्होंने प्रमुख निवेशकों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया और निजी क्षेत्र के सीईओ, अध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की।


जी20 बैठक की मेज़बानी

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट एशविल में जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की बैठक की मेज़बानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक वृद्धि को गति देने की कोशिशों के समान, इस वर्ष जी20 के 'फाइंसेस ट्रैक' के मेज़बान के रूप में आर्थिक वृद्धि को प्राथमिकता दी जा रही है।


3एम के साथ बैठक

सीतारमण ने रविवार को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी 3एम के अध्यक्ष और सीईओ विलियम ब्राउन से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत के साथ 3एम की भागीदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की गई। मंत्रालय ने बताया कि भारत अब केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं है, बल्कि यह उन्नत विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और नवोन्मेष के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।


भविष्य की संभावनाएं

सीतारमण ने कहा कि 3एम की क्षमताओं के माध्यम से भारत में स्थानीयकरण, अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने भारतीय प्रतिभा और विनिर्माण क्षमताओं का उपयोग करके घरेलू और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया। ब्राउन ने भारत में कुशल प्रतिभाओं की उपलब्धता की सराहना की और कहा कि देश में प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में भी कई अवसर हैं।