पंजाब कांग्रेस में खींचतान: भूपेश बघेल की चंडीगढ़ यात्रा
पंजाब में कांग्रेस की आंतरिक चुनौतियाँ
पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब स्पष्ट रूप से सामने आ गई है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने स्थिति को संभालने के लिए भूपेश बघेल, जो छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, को चंडीगढ़ भेजा है। उन्होंने सोमवार को चंडीगढ़ पहुंचते ही वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया। उनका मुख्य उद्देश्य नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को कम करना और चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करना है।
भूपेश बघेल और प्रताप सिंह बाजवा की बैठक
चंडीगढ़ पहुंचने के बाद भूपेश बघेल की पहली अनौपचारिक बैठक विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के निवास पर हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच लगभग 50 मिनट तक चर्चा हुई। बैठक के बाद बाजवा ने कहा कि पार्टी के भीतर जो भी मतभेद हैं, उन्हें बातचीत के माध्यम से सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि सभी वरिष्ठ नेता जल्द ही एक मंच पर दिखाई देंगे।
नेताओं की शिकायतों का समाधान
प्रताप सिंह बाजवा ने बताया कि हाल ही में घोषित संगठनात्मक समितियों को लेकर कई नेताओं में असंतोष है। भूपेश बघेल व्यक्तिगत रूप से सभी नेताओं की शिकायतें सुनेंगे। यदि कोई नेता पार्टी हाईकमान से मिलना चाहता है, तो उसके लिए भी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि बघेल अगले पांच दिनों तक पंजाब में रहकर नेताओं और कार्यकर्ताओं से विभिन्न स्तरों पर बातचीत करेंगे।
चन्नी और वड़िंग के बीच विवाद
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच मतभेदों की चर्चा लगातार हो रही है। चन्नी के समर्थक नेता वड़िंग को अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, बाजवा ने कहा कि पार्टी के सभी नेता मिलकर समाधान निकालेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान बातचीत के लिए एक टेबल पर बैठ सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?
जलालपुर को कारण बताओ नोटिस
इसी बीच, पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के करीबी सहयोगी और पूर्व विधायक मदन लाल जलालपुर को पंजाब कांग्रेस की नवगठित अनुशासन समिति ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। समिति के अध्यक्ष अवतार हेनरी ने उनसे पिछले सप्ताह चन्नी के आवास पर हुई बैठक में दिए गए बयान पर तीन दिन में जवाब मांगा है। इस कदम को पार्टी अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव से पहले एकजुटता की आवश्यकता
कांग्रेस नेतृत्व को यह भलीभांति ज्ञात है कि चुनाव से पहले गुटबाजी का प्रभाव सीधे संगठन पर पड़ सकता है। इसलिए भूपेश बघेल की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं मानी जा रही है। पार्टी अब प्रयास कर रही है कि नाराज नेताओं को एकजुट कर चुनावी तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया जाए। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस अपनी आंतरिक खाई को कितनी भर पाती है।
