पंजाब में धान की खेती में नहरों के पानी का उपयोग बढ़ा
पंजाब में धान की खेती का नया दृष्टिकोण
पंजाब में इस वर्ष धान की खेती के लिए एक नई रणनीति अपनाई जा रही है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में किसान अब ट्यूबवेल के बजाय नहरों के पानी का उपयोग कर रहे हैं। इसे सरकार की सिंचाई प्रणाली में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नहरों के पानी से फसल की तैयारी में तेजी
आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह ने अपने खेतों से लाइव जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बार धान की फसल के लिए नहरों का पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद किसानों को सिंचाई के लिए इतना अच्छा सहयोग मिला है। खेतों में धान की रोपाई से पहले पानी भरने और भूमि तैयार करने का कार्य तेजी से चल रहा है। किसानों का कहना है कि नहरों में निरंतर पानी मिलने से उन्हें डीजल और बिजली पर कम खर्च करना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत में कमी आ रही है।
किसानों में बढ़ा विश्वास
कुलदीप सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा करने का प्रयास किया है। उन्होंने बताया कि कई गांवों में किसान नहरों के पानी का सीधा लाभ उठा रहे हैं। इससे भूजल पर दबाव कम होगा और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। किसानों का मानना है कि यदि नहरों में इसी तरह पानी की उपलब्धता बनी रही, तो भविष्य में खेती और भी आसान हो सकती है।
जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि नहरों के पानी का अधिक उपयोग पंजाब के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। राज्य में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी सुविधाएं प्रदान करना है, जिससे खेती टिकाऊ और कम खर्चीली हो सके। धान की खेती में नहरों के पानी के बढ़ते उपयोग को पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
