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पंजाब में पराली प्रबंधन पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की नई पहल

पंजाब में धान की कटाई के समय पराली प्रबंधन पर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसानों पर FIR दर्ज करने के बजाय आर्थिक सहायता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने केंद्र से नकद प्रोत्साहन की मांग की है, ताकि किसान पराली न जलाएं। इसके अलावा, उन्होंने प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी आपत्ति जताई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
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मुख्यमंत्री भगवंत मान का पराली प्रबंधन पर जोर


जैसे-जैसे धान की कटाई का समय नजदीक आ रहा है, पंजाब में पराली प्रबंधन पर चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि किसानों पर FIR दर्ज करना कोई समाधान नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उन्हें अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े।


किसानों के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में किसान मेले के उद्घाटन के दौरान, भगवंत मान ने कहा कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि धान उगाने वाले किसानों को पराली न जलाने के लिए नकद प्रोत्साहन दिया जाए। किसान संगठनों ने प्रति एकड़ 3,000 रुपये की सहायता की मांग की है। किसानों का कहना है कि धान की कटाई और गेहूं की बुआई के बीच समय बहुत कम होता है, जिससे पराली हटाने में अतिरिक्त खर्च बढ़ जाता है। मान ने यह भी कहा कि किसान खुद धुएं से प्रभावित होते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और फसलों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।


पंजाब के किसानों पर आरोप लगाने पर आपत्ति

मुख्यमंत्री ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लिए हर साल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि केवल पंजाब के धुएं को दोष देना उचित नहीं है और हरियाणा, उत्तर प्रदेश जैसे अन्य क्षेत्रों के उत्सर्जन को भी ध्यान में रखना चाहिए। मान ने पाकिस्तान के पंजाब का उदाहरण देते हुए हवा में प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई। किसान नेताओं ने पुराने मामलों को वापस लेने की मांग की है। सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने सरकार से पहले दर्ज FIR को वापस लेने का अनुरोध किया, जबकि हरिंदर सिंह लाखोवाल ने नकद सहायता की मांग को दोहराया।


पराली जलाने की घटनाओं में कमी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले वर्षों में काफी कमी आई है। 2023 में 36,663 मामलों की तुलना में 2025 में केवल 5,114 घटनाएं दर्ज की गईं, जो लगभग 86 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती हैं। पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि मशीनों पर सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। केंद्र की योजना के तहत, किसानों को मशीन खरीदने पर 50 प्रतिशत तक और सहकारी समितियों, किसान संगठनों व पंचायतों को कुछ मामलों में 80 प्रतिशत तक सहायता दी जाती है। पंजाब में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, बेलर और रेक जैसी मशीनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।