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पंजाब में बुजुर्गों की संख्या बढ़ी, बच्चों की संख्या में कमी

पंजाब में जनसंख्या के ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है, जिसमें बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि और बच्चों की संख्या में कमी देखी जा रही है। केंद्र सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जन्म दर में गिरावट और युवाओं का विदेश पलायन इस बदलाव के मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो इसका प्रभाव राज्य के श्रम बाजार और सामाजिक ढांचे पर पड़ सकता है। जानें इस विषय पर और क्या कहती है रिपोर्ट।
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पंजाब में बुजुर्गों की संख्या बढ़ी, बच्चों की संख्या में कमी

पंजाब की जनसंख्या में बदलाव

पंजाब में जनसंख्या के ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बच्चों की संख्या में निरंतर कमी आ रही है, जबकि बुजुर्गों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। जन्म दर में गिरावट और युवाओं का विदेशों की ओर बढ़ता रुझान इस बदलाव के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो भविष्य में राज्य के श्रम बाजार और सामाजिक ढांचे पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


बच्चों की जनसंख्या में गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 0 से 14 वर्ष की आयु वर्ग की जनसंख्या केवल 19.2 प्रतिशत है, जो कि राष्ट्रीय औसत 24 प्रतिशत से काफी कम है। पड़ोसी राज्यों हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की तुलना में भी पंजाब पीछे है। विशेष रूप से, 0 से 4 वर्ष की आयु वर्ग की हिस्सेदारी केवल 6 प्रतिशत है, जो दर्शाता है कि राज्य में जन्म दर में निरंतर कमी आ रही है। यह प्रवृत्ति ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।


बुजुर्गों की संख्या में वृद्धि

दूसरी ओर, 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में बुजुर्ग जनसंख्या 11.5 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो राष्ट्रीय औसत 9.7 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह प्रतिशत और भी अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्गों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।


जन्म दर में कमी

पंजाब की जन्म दर पिछले एक दशक में लगातार गिर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, 2012-14 के दौरान यह दर 15.7 थी, जबकि 2022-24 में घटकर 13.9 रह गई। यह राष्ट्रीय औसत 18.6 से काफी कम है। जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति और बदलती जीवनशैली भी इस बदलाव के पीछे महत्वपूर्ण कारण हैं।


विदेश पलायन का प्रभाव

रिपोर्ट में युवाओं के विदेश जाने की बढ़ती प्रवृत्ति को भी चिंता का विषय बताया गया है। अनुमान है कि हर साल डेढ़ लाख से दो लाख युवा पंजाब छोड़कर विदेशों का रुख कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश वापस नहीं लौटते। विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म दर में गिरावट और युवाओं के पलायन का संयुक्त प्रभाव भविष्य में कुशल कार्यबल की कमी पैदा कर सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक और सामाजिक संरचना पर दूरगामी असर पड़ने की आशंका है।