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पंजाब में महिलाओं के लिए हेल्प डेस्क: अपराधों का त्वरित निस्तारण

पंजाब पुलिस ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था को मजबूत किया है। अब तक 2 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 75 प्रतिशत का निस्तारण किया गया है। पुलिस का दावा है कि इस पहल ने थानों में महिलाओं का विश्वास बढ़ाया है। जानें इस व्यवस्था के तहत कैसे महिला मित्रों ने पीड़ितों को सहायता प्रदान की है और जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग को कैसे प्रभावी बनाया जा रहा है।
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महिला हेल्प डेस्क का प्रभावी कार्यान्वयन


महिलाओं और बच्चों से संबंधित अपराधों की शिकायतों के त्वरित समाधान और पीड़ितों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए पंजाब पुलिस ने महिला हेल्प डेस्क की व्यवस्था को मजबूत किया है।


शिकायतों की संख्या में वृद्धि

पुलिस के अनुसार, राज्य के सभी 424 थानों में स्थापित महिला हेल्प डेस्क पर अब तक 2 लाख 31 हजार 677 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। पुलिस का मानना है कि इस पहल ने थानों में आने वाली महिलाओं का विश्वास बढ़ाया है।


महिला मित्रों की तैनाती

पंजाब पुलिस के महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सहायता प्रदान करने के लिए सभी 424 थानों में 848 महिला मित्रों की नियुक्ति की गई है। इनमें 39 विशेष उद्देश्य वाले थाने भी शामिल हैं। इन महिला मित्रों का कार्य पीड़ितों की शिकायतों को सुनना, मार्गदर्शन देना और मामलों के त्वरित निस्तारण में मदद करना है।


जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग का उद्देश्य

महिला हेल्प डेस्क की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जेंडर सेंसिटिव पुलिसिंग को और प्रभावी बनाना है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि महिलाएं और बच्चे बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज कर सकें। इसके साथ ही उन्हें कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों की जानकारी भी समय पर दी जा रही है।


शिकायतों का निस्तारण

पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से 30 जून 2026 के बीच पंजाब शिकायत निस्तारण पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से संबंधित 1 लाख 33 हजार 152 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से लगभग 74.8 प्रतिशत, यानी 99 हजार 692 मामलों का निस्तारण महिला मित्रों की सहायता से किया गया।


पुलिस का कहना है कि यह आंकड़ा महिला हेल्प डेस्क की सक्रियता और प्रभावशीलता को दर्शाता है। घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, छेड़छाड़ और अन्य संवेदनशील मामलों में पीड़ितों को प्रारंभिक सहायता प्रदान की जा रही है। महिला मित्रों की भूमिका से पुलिस और आम जनता के बीच संवाद पहले से अधिक मजबूत हुआ है।