पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना: स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री सेहत योजना का महत्व
पंजाब में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सेहत योजना स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बन गई है। इस योजना के तहत योग्य परिवारों को हर वर्ष 10 लाख रुपये तक कैशलेस चिकित्सा सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, अब तक 26,18,712 लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है, और 3,02,906 मरीजों ने उपचार प्राप्त किया है। इन मरीजों के लिए कुल 6,06,892 उपचार की प्रक्रिया पूरी की गई है। योजना में सरकारी और निजी दोनों प्रकार के अस्पताल शामिल हैं।
उपचार की संख्या में वृद्धि
इस योजना के अंतर्गत 880 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है, और औसत दावे की राशि 14,628.04 रुपये रही है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, पिछले सात महीनों में छह लाख से अधिक उपचार दर्ज किए गए हैं। इनमें 1,99,417 दीर्घकालिक डायलिसिस, 60,504 कैंसर के मामले और 1,85,220 आपातकालीन उपचार शामिल हैं। गंभीर बीमारियों के इलाज में इस योजना का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
महत्वपूर्ण चिकित्सा खर्च
हृदय रोगों के उपचार भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। डायग्नोस्टिक एंजियोग्राफी सहित 10,428 पीटीसीए प्रक्रियाओं पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सीएबीजी के 611 उपचारों पर लगभग 8.20 करोड़ और 507 पेसमेकर प्रक्रियाओं पर करीब 6.79 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। कैंसर के 60,504 मामलों पर लगभग 159.41 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी मिली है।
घुटना और हिप प्रत्यारोपण की जानकारी
हड्डी और जोड़ से संबंधित बीमारियों के उपचार में भी इस योजना का व्यापक उपयोग हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 11,796 घुटना प्रत्यारोपण पर 94.89 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। वहीं, 1,092 हिप प्रत्यारोपण पर 10.75 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है। इसके अलावा, 2,200 से अधिक फ्रैक्चर फिक्सेशन प्रक्रियाएं भी की गई हैं। डायलिसिस के 2,02,793 मामलों पर करीब 33.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार
आंकड़ों के अनुसार, निजी अस्पतालों में 3,36,161 मामलों का उपचार किया गया, जबकि सरकारी अस्पतालों में 2,70,731 मामले दर्ज किए गए। निजी संस्थानों में लगभग 614.08 करोड़ और सरकारी अस्पतालों में 479.85 करोड़ रुपये खर्च हुए। जिलों में पटियाला 28,977 मरीजों के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद बठिंडा में 23,446, लुधियाना में 22,620 और जालंधर में 20,193 मरीजों का उपचार हुआ।
लाभार्थियों के अनुभव
योजना का प्रभाव केवल आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि मरीजों के अनुभवों में भी स्पष्ट है। संदीप कौर ने पित्ताशय और रीढ़ की बीमारी का सफल उपचार कराया और इसे अपने जीवन में सुधार से जोड़ा। स्तन कैंसर का उपचार करा रहीं निशि गुप्ता ने स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से आर्थिक बोझ कम होने की बात कही। पटियाला के हाकम सिंह को हृदय संबंधी आपात स्थिति में योजना से उपचार मिला। लाभार्थियों के लिए कैशलेस सुविधा ने उपचार के दौरान वित्तीय चिंता को कम किया है।
