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पंजाब में 'सतलुज' फिल्म के हटाने पर राजनीतिक विवाद

पंजाब में दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्णय ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे गलत बताया है, यह कहते हुए कि फिल्म में पंजाब के इतिहास और युवाओं पर हुए अत्याचारों को दर्शाया गया है। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस को तेज कर दिया है, जिससे पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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फिल्म 'सतलुज' के हटने पर उठे सवाल

चंडीगढ़: पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्णय ने पंजाब में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे अनुचित करार दिया है।


मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह फिल्म पंजाब के इतिहास और राज्य के कठिन समय को दर्शाती है। उनका कहना है कि फिल्म में 1992 से 1997 के बीच पंजाब में युवाओं पर हुए कथित अत्याचारों को दिखाया गया है, और ऐसे संवेदनशील विषयों को छिपाना उचित नहीं है।


इतिहास को दिखाने पर रोक का सवाल

‘इतिहास को दिखाने से क्यों रोका जा रहा है?’


हरपाल सिंह चीमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फिल्म में पंजाब के उस कठिन दौर की घटनाओं को दर्शाया गया है, जिससे समाज को अपने इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में दिखाए गए घटनाक्रम उस समय की राजनीतिक व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करते हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में उठाए गए मुद्दों के कारण भाजपा और कांग्रेस दोनों पर सवाल उठते हैं, इसलिए इसे हटाने का निर्णय लिया गया है।


सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस

फिल्म हटाने को लेकर विवाद बढ़ा


'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक सर्कलों में बहस तेज हो गई है। समर्थकों का मानना है कि ऐतिहासिक और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए, जबकि विरोधी पक्ष अलग-अलग तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।


फिलहाल, इस फिल्म को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और इस मुद्दे ने पंजाब की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है।