पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: राजनीतिक गतिविधियों में तेजी
पंजाब चुनाव 2027 की तैयारी
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखें भले ही दूर हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। राज्य की चार प्रमुख राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने मुद्दों और दावों के साथ चुनावी मैदान में उतरने लगी हैं। नेताओं ने यात्राओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से जनता से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हर पार्टी अपने कार्यों, संगठन और राजनीतिक विरासत को उजागर कर मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
आम आदमी पार्टी का चुनावी आधार
आम आदमी पार्टी की सरकार अपने कार्यकाल के दौरान किए गए कार्यों को चुनावी आधार बनाने की योजना बना रही है। दूसरी ओर, बीजेपी केंद्र और अन्य राज्यों में अपनी सरकारों के प्रदर्शन को पंजाब के लिए एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर रही है। शिरोमणि अकाली दल अपने पुराने पंथक आधार और प्रकाश सिंह बादल की विरासत को आगे रख रहा है। कांग्रेस भी गुटबाजी से ऊपर उठकर सामूहिक नेतृत्व और एकजुटता का संदेश देने में जुटी है।
घर-घर संपर्क अभियान
घर-घर पहुंचाने की तैयारी में आप
वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार, आम आदमी पार्टी का मुख्य ध्यान सरकार के पिछले साढ़े चार वर्षों के रिपोर्ट कार्ड और विकास मॉडल को जनता तक पहुंचाना है। पार्टी ने 20 सितंबर से राज्यव्यापी घर-घर संपर्क अभियान की शुरुआत की है, जिसमें 2.68 लाख से अधिक बूथ कमेटी सदस्यों के माध्यम से हर परिवार तक पहुंचने की योजना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धूरी से इस अभियान का उद्घाटन किया।
बीजेपी का चुनावी दावा
117 सीटों पर अकेले उतरने का दावा
बीजेपी नेता सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने और सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के अनुसार, पार्टी केंद्र और अन्य राज्यों की भाजपा सरकारों के कार्यों को जनता के सामने रख रही है। नशे और गैंगस्टरवाद के खिलाफ कार्रवाई को भी पार्टी अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल कर रही है। भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा सभी 117 सीटों तक पहुंच रही है।
अकाली दल की रणनीति
बादल की विरासत पर अकाली दल का भरोसा
शिरोमणि अकाली दल अपनी पारंपरिक राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश सिंह बादल की विरासत को प्रमुखता से सामने रख रहा है। पार्टी उनके कार्यकाल के विकास कार्यों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ाव को अपनी पहचान बता रही है। सुखबीर सिंह बादल की रैलियों में अकाली सरकारों के दौरान हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया जा रहा है। पार्टी पुराने समर्थक वर्ग को फिर जोड़ने की कोशिश में है।
कांग्रेस की एकजुटता
कांग्रेस ने दिखाया सामूहिक नेतृत्व
कांग्रेस भी चुनावी तैयारी में एकजुटता का संदेश देने पर जोर दे रही है। सचिन पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी सामूहिक नेतृत्व को सामने रख रही है। 15 सितंबर के प्रदर्शन में चरणजीत सिंह चन्नी, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप बाजवा और सुखजिंदर रंधावा का एक मंच पर आना इसी रणनीति का हिस्सा रहा। पायलट ने चन्नी और वड़िंग के हाथ मिलवाकर कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता का संदेश दिया।
