पंजाब विधानसभा चुनाव: कांग्रेस में एकता की कोशिशें तेज
पंजाब चुनावों की तैयारी में कांग्रेस की हलचल
जैसे-जैसे पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, कांग्रेस पार्टी के अंदर राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। टिकट के लिए इच्छुक कई नेता दिल्ली जाकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं।
साथ ही, कांग्रेस नेतृत्व पंजाब में लंबे समय से चल रही गुटबाजी को समाप्त करने और संगठन को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है.
किशोरी लाल शर्मा का एकता का संदेश
हाल ही में कांग्रेस सांसद किशोरी लाल शर्मा की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, विधायक अंगद सिंह और कांग्रेस नेता भारत भूषण आशू भी शामिल हुए।
बैठक के दौरान, किशोरी लाल शर्मा ने सभी नेताओं से मिलकर काम करने और पार्टी के हित को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक मजबूत संगठन और एकजुट नेतृत्व ही चुनाव में सफलता की कुंजी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती नेताओं को एक मंच पर लाना और कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश देना है।
पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी की समस्या
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से विभिन्न गुटों में विभाजित रही है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के अपने-अपने समर्थक समूह हैं, जिसके कारण समय-समय पर अंदरूनी मतभेद भी उभरते रहे हैं। प्रताप सिंह बाजवा को प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक नेतृत्व का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है। वहीं, भारत भूषण आशू को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के करीबी नेताओं में गिना जाता है और लुधियाना की राजनीति में उनका प्रभाव है।
कुछ समय पहले, हलका पश्चिमी उपचुनाव के दौरान भी कांग्रेस के भीतर आपसी तालमेल को लेकर चर्चाएँ हुई थीं। उस समय भारत भूषण आशू के चुनाव प्रचार में प्रताप सिंह बाजवा की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी थी। बैठक में नेताओं ने पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठन की मजबूती और जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। पार्टी को गांव, शहर और बूथ स्तर तक मजबूत बनाने के लिए रणनीतियों पर भी विचार किया गया।
