Newzfatafatlogo

पंजाब विधानसभा में वित्तीय और कृषि मुद्दों पर चर्चा का दिन

पंजाब विधानसभा में आज वित्तीय और कृषि मुद्दों पर महत्वपूर्ण चर्चा होने जा रही है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा सरकारी उपक्रम समिति की रिपोर्ट पेश करेंगे, जबकि कृषि से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि दी जाएगी। विपक्षी दलों की सक्रियता के बीच, यह सत्र किसानों के हितों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।
 | 

पंजाब विधानसभा में महत्वपूर्ण चर्चा


चंडीगढ़: आज पंजाब विधानसभा में वित्तीय और कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने जा रही है। मानसून सत्र के चौथे दिन सदन में हलचल की उम्मीद है। प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद सरकार कई वित्तीय प्रस्ताव, विधेयक और अनुदान मांगें पेश करेगी।


वित्तीय प्रस्तावों की प्रस्तुति

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी उपक्रम समिति की 129वीं रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक रिपोर्टें और लेखा-जोखा भी पेश किए जाएंगे। इन दस्तावेजों पर चर्चा के दौरान विपक्षी दल सरकार से कई सवाल पूछ सकते हैं।


विधेयक और अनुदान मांगों पर चर्चा

आज का दिन शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा। सदन में इन तीनों महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए एक संकल्प प्रस्ताव लाया जाएगा। इस प्रस्ताव में युवाओं को उनके विचारों से जोड़ने और उनके बलिदान को सम्मान देने की बात की जाएगी।


कृषि और किसान कल्याण से जुड़े मुद्दे भी आज की कार्यसूची में महत्वपूर्ण हैं। सरकार केंद्र से कृषि को राज्य सूची का विषय बनाने की मांग करेगी। इसके साथ ही किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने, कृषि अनुसंधान को मजबूत करने और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा होगी।


विपक्ष पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार के खिलाफ सक्रिय है। बुधवार को हुए हंगामे के बाद आज भी सदन में तीखी बहस और नारेबाजी की संभावना बनी हुई है। कृषि संबंधी प्रस्तावों पर विपक्षी दल किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार पर दबाव बना सकते हैं।


पंजाब की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है। इसलिए इन प्रस्तावों के माध्यम से राज्य सरकार केंद्र के सामने किसानों के हितों को मजबूती से रखने की कोशिश करेगी। वित्तीय विधेयकों और अनुदान मांगों पर चर्चा से सरकार की प्राथमिकताएं भी स्पष्ट होंगी।