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पंजाब सरकार का बड़ा कदम: 10 लाख नए राशन कार्ड जारी होंगे

पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में 10 लाख नए राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया की शुरुआत की है। यह योजना जरूरतमंद परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जिसमें पारदर्शिता और तकनीकी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे लोग आसानी से आवेदन कर सकेंगे। जानें इस योजना के बारे में और अधिक जानकारी।
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का ऐलान


मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब में 10 लाख नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत की है।


पंजाब सरकार ने आम जनता की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज से नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि राज्य में 10 लाख जरूरतमंद परिवारों के लिए नए राशन कार्ड जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया 'न कैश, न सिफारिश' के सिद्धांत पर आधारित होगी, जिससे पारदर्शिता और तकनीकी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।


राशन कार्ड की श्रेणियाँ

इस योजना में समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। कुल 10 लाख लाभार्थियों में से 7 लाख राशन कार्ड नए पात्र परिवारों को दिए जाएंगे, जबकि 3 लाख ई-श्रम पंजीकृत और प्रवासी श्रमिकों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही, प्रत्येक नए लाभार्थी को 5 किलोग्राम गेहूं के साथ 'मेरी रसोई पौष्टिक किट' भी प्रदान की जाएगी।


पारदर्शी प्रक्रिया का आश्वासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरियों की तरह अब राशन कार्ड भी न सिफारिश, न बिचौलियों और न ही रिश्वत के आधार पर जारी किए जाएंगे। सभी आवेदकों का मूल्यांकन एक समान पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।


आवेदन प्रक्रिया की सरलता

मुख्यमंत्री ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। लोग ऑनलाइन, सेवा केंद्रों, कॉमन सर्विस सेंटरों या जिला खाद्य कार्यालयों में आवेदन कर सकते हैं। प्रत्येक आवेदक को एसएमएस के माध्यम से रसीद प्राप्त होगी और वह अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा।


आवेदन का लिंक खाद्य विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में व्यापक सुधार किया गया है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। पहले मैनुअल सत्यापन और मनमाने निर्णयों के कारण भ्रष्टाचार की शिकायतें आती थीं, जिससे वास्तविक जरूरतमंद लोग वंचित रह जाते थे।