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पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतन विवाद पर हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े विवाद पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 2025 में सेवा नियमों में बदलाव उन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा, जिनकी नियुक्ति संशोधन की अधिसूचना से पहले हुई थी। सरकार के आश्वासन के बाद, अदालत ने लंबित अपीलों का निपटारा किया। जानें इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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चंडीगढ़ में हाई कोर्ट का फैसला


चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों के वेतनमान से संबंधित एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 2025 में सेवा नियमों में होने वाले बदलाव उन कर्मचारियों पर लागू नहीं होंगे, जिनकी नियुक्ति संशोधन की अधिसूचना जारी होने से पहले हुई थी। सरकार द्वारा स्थिति स्पष्ट करने के बाद, अदालत ने लंबित अपीलों का निपटारा किया।


सरकारी निर्देशों का मामला

यह मामला पंजाब सरकार द्वारा 17 जुलाई 2020 को जारी निर्देशों से संबंधित है। इन निर्देशों में कहा गया था कि पंजाब सरकार या उसकी संस्थाओं में सीधी भर्ती और अनुकंपा नियुक्ति पर मिलने वाला वेतनमान केंद्रीय संवर्ग के सातवें वेतन आयोग के वेतनमान से अधिक नहीं होना चाहिए। हालांकि, इसके लिए संबंधित सेवा नियमों में संशोधन आवश्यक था।


निर्देशों का बिना नियमों के लागू होना

कई विभागों ने सेवा नियमों में संशोधन किए बिना ही 2020 के निर्देशों को लागू करना शुरू कर दिया। इससे प्रभावित कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि 2025 में किए गए संशोधन का प्रभाव केवल उन नियुक्तियों पर होगा, जो संशोधन की अधिसूचना जारी होने के बाद हुई हैं। पहले से सेवा में मौजूद कर्मचारियों पर इसका प्रतिकूल असर नहीं होगा।


दावों पर निर्णय की समयसीमा

हाई कोर्ट ने सरकार के आश्वासन को अपने आदेश में शामिल किया है। अदालत ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी का वेतन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार नहीं है, तो वह संबंधित विभाग के समक्ष आवेदन कर सकता है। सरकार को ऐसे आवेदन पर तीन महीने के भीतर निर्णय लेना होगा। यदि कर्मचारी को किसी लाभ का हकदार पाया जाता है, तो उसे अगले छह सप्ताह के भीतर वह लाभ प्रदान करना होगा।


पुराने आदेशों की स्थिति

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के आश्वासन या 'सौरभ शर्मा' फैसले के अनुरूप न होने वाले पुराने आदेश प्रभावी नहीं माने जाएंगे। विशेष रूप से, ऐसे आदेश जिनमें कर्मचारियों को वेतनमान का लाभ देने से इनकार किया गया है, उन्हें संबंधित कर्मचारी चुनौती दे सकते हैं। कर्मचारी अपने दावे को विभाग के समक्ष फिर से रख सकता है और नियमानुसार उस पर विचार किया जाएगा।


परिवीक्षा अवधि के वेतन पर स्थिति

हालांकि, अदालत ने परिवीक्षा अवधि के दौरान कर्मचारियों को पूर्ण वेतन देने के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं दिया। यह विषय वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है, इसलिए हाई कोर्ट ने इस प्रश्न को अपने आदेश में शामिल नहीं किया। मौजूदा आदेश मुख्य रूप से 2025 के सेवा नियम संशोधन को पिछली तारीख से लागू करने और उससे प्रभावित कर्मचारियों के वेतन विवाद पर केंद्रित है।