पटना में चंदन हत्याकांड: पत्नी और प्रेमी को मिली उम्रकैद
बिहार में चंदन हत्याकांड का अदालती फैसला
पटना जिले में लगभग 12 साल पुराने चंदन हत्याकांड में न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। दानापुर व्यवहार न्यायालय ने मृतक चंदन की पत्नी अनिशा कुमारी और उसके प्रेमी पप्पू कुमार को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, अदालत ने दोनों पर 75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे चंदन के पिता को देने का आदेश दिया गया है। इस मामले में दो अन्य आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका है.
शादी के बाद रिश्ते में तनाव
चंदन कुमार और अनिशा की शादी 2008 में हुई थी। प्रारंभिक दिनों में उनका रिश्ता सामान्य था, लेकिन समय के साथ तनाव बढ़ने लगा। इसी दौरान अनिशा का पप्पू कुमार से संबंध होने की बात सामने आई। दोनों की पहले से पहचान थी और शादी के बाद भी उनकी मुलाकातें जारी रहीं, जिसका चंदन ने विरोध किया।
आपत्तिजनक स्थिति में देखने का मामला
मामले के अनुसार, चंदन ने अपनी पत्नी और पप्पू को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। उसने इस बारे में अपने पिता सुदर्शन प्रसाद को बताया। परिवार में विवाद बढ़ने के बाद पंचायत भी हुई, जिसमें दोनों पक्षों के बीच बातचीत से मामले को सुलझाने की कोशिश की गई। अभियोजन के अनुसार, 13 जुलाई 2014 को समझौता हुआ था, जिसमें पप्पू ने अनिशा से संबंध न रखने की बात कही थी।
समझौते के बाद हत्या का मामला
पंचायत के अगले दिन, 14 जुलाई 2014 को चंदन की हत्या कर दी गई। उसके पिता ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि अनिशा, पप्पू और अन्य लोगों ने चंदन के साथ मारपीट की और उसकी हत्या की। आरोप यह भी था कि वारदात को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
पुलिस जांच और अदालत का निर्णय
चंदन की मौत की जानकारी मिलने के बाद, सुदर्शन प्रसाद ने नौबतपुर थाने में अनिशा, पप्पू, उमेर यादव और भीम यादव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस जांच में अनिशा और पप्पू के खिलाफ आरोप सही पाए गए, जबकि उमेर यादव और भीम यादव को साक्ष्य की कमी के कारण बरी कर दिया गया। अब अदालत ने अनिशा और पप्पू को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
जुर्माने की राशि का आदेश
अदालत ने दोनों दोषियों पर 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जो चंदन के पिता को दिया जाएगा। एक दशक से अधिक समय बाद आए इस फैसले ने मामले में कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया है। अदालत के निर्णय ने 2014 में शुरू हुए इस हत्या मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
