पाकिस्तान में बगावत: सेना और आतंकियों के खिलाफ जनता का गुस्सा
पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकियों द्वारा पुलिसकर्मियों के अपहरण के बाद देश में बगावत का माहौल बन गया है। जनता ने सेना के खिलाफ भी आवाज उठाई है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। बलूचिस्तान में सेना के अत्याचारों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा है, और लोग सड़कों पर उतर आए हैं। जानें कैसे यह बगावत पाकिस्तान के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
| Jul 10, 2026, 14:11 IST
पाकिस्तान में बढ़ती बगावत
पाकिस्तान में इस समय एक बड़ी बगावत का दौर चल रहा है, जो शहबाज सरकार और जनरल आसिम मुनीर के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने खुलेआम पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिया है। इस घटना के बाद पूरे देश में हाहाकार मच गया है। कोएटा की सड़कों पर रातभर आग और बारूद का तांडव देखने को मिला है। इस बार गुस्सा केवल आतंकियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की जनता ने अपनी सेना के खिलाफ भी आवाज उठाई है। हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं, रास्ते जाम कर दिए हैं, और सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। यह दहशतगर्दी का मामला अब वर्दीधारी लोगों से जुड़ गया है, और कोएटा में 'शेमशेम' के नारों से गूंज रहा है।
सेना की नाकामी और जनता का आक्रोश
जनरल मुनीर और उनकी सेना का असली चेहरा अब सामने आ रहा है। जब टीटीपी के आतंकवादी कोएटा और जियारत में पुलिस अधिकारियों को निशाना बना रहे थे, तब पाकिस्तानी सेना ने तीन घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं की। आतंकियों ने पुलिस अधिकारियों की लाशें तक उठाकर ले गए, जबकि सेना ने उन्हें खोजने की कोशिश भी नहीं की। जब मृतकों के परिजनों ने खुद लाशें खोजने की कोशिश की, तब सेना के जवान वहां पहुंच गए और लाशें छीनने लगे। इस पर परिजनों ने अस्पताल में जाकर सेना के जवानों को खदेड़ दिया। यह गुस्सा यूं ही नहीं भड़का है; बलूचिस्तान में सेना द्वारा आम नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचारों के कारण यह स्थिति बनी है।
पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में असंतोष
अब इस नाकामी की कीमत पुलिस और आम जनता को चुकानी पड़ रही है। परिजन शवों के साथ अस्पताल के बाहर डटे हुए हैं। क्वेटा में बगावत अपने चरम पर है, और यह सब तब हो रहा है जब पाकिस्तान चारों ओर से जल रहा है। पीओके में लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर हैं, और बलूचिस्तान भी अब स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहा है। बलोच विद्रोही पाकिस्तानी फौजियों को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जो देश दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वह खुद उसी में दफन हो जाता है। भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान अब अपने ही पाले हुए सांपों के डंक से तड़प रहा है। पीओके हाथ से निकल रहा है, बलूचिस्तान आजादी की ओर बढ़ रहा है, और क्वेटा की सड़कों पर सेना के खिलाफ यह जन आक्रोश यह संकेत दे रहा है कि पाकिस्तान के टुकड़े होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है।
