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प्रधानमंत्री मोदी का किर्गिस्तान दौरा: महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि और भारतीय समुदाय से संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने भारतीय समुदाय के सदस्यों, शिक्षाविदों और योग प्रेमियों से संवाद किया, जिसमें गांधी जी के विचारों का महत्व और भारत-किर्गिज गणराज्य के बीच संबंधों पर चर्चा की गई। मोदी ने क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने की इच्छा व्यक्त की। जानें इस दौरे की अन्य महत्वपूर्ण बातें।
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प्रधानमंत्री मोदी का शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भागीदारी

किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय समुदाय के सदस्यों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और योग प्रेमियों से बातचीत की। मोदी ने गांधी जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके विचारों के स्थायी प्रभाव को याद किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, 'गांधी जी के विचारों का हमारे मन पर हमेशा अद्वितीय प्रभाव रहेगा।'


विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि मोदी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देते हुए 'शांति, अहिंसा और सद्भाव के उनके शाश्वत संदेश' को याद किया। जायसवाल ने एक पोस्ट में कहा, 'श्रद्धांजलि ने गांधी जी के आदर्शों की चिरस्थायी प्रासंगिकता और उनकी सार्वभौमिक स्वीकार्यता को दर्शाया।'


इसके बाद, प्रधानमंत्री ने 'भारत के मित्रों' के एक समूह से मुलाकात की, जिसमें भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्य, पर्यावरण प्रेमी, योग साधक, शिक्षाविद और भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागी शामिल थे। मोदी ने कहा, 'भारत से करीबी जुड़ाव रखने वाले लोगों के एक समूह से मिलकर खुशी हुई।'


आईटीईसी के पूर्व प्रतिभागी 160 से अधिक देशों के पेशेवर हैं जिन्होंने भारत में पूरी तरह वित्तपोषित तकनीकी और आर्थिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किया है। मोदी ने बताया कि उनसे मिले योग साधकों में से एक ने विश्व योगासन चैंपियनशिप के लिए अहमदाबाद की यात्रा की थी और वहां पदक जीता था।


भारत और किर्गिज गणराज्य के बीच संबंधों पर चर्चा

जायसवाल ने कहा कि बिश्केक में 'भारत के मित्रों' के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत और किर्गिज गणराज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रवत संबंधों और सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने और बहुआयामी साझेदारी का विस्तार करने के अवसरों पर चर्चा की।


प्रधानमंत्री एससीओ के 26वें शिखर सम्मेलन में भाग लेने और सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने के लिए रविवार को बिश्केक पहुंचे थे।


एससीओ की 25वीं वर्षगांठ

दस सदस्यीय एससीओ इस वर्ष अपनी स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस संगठन की स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने की थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने।


इसके बाद ईरान 2023 और बेलारूस 2024 में संगठन में शामिल हुए। मोदी ने शनिवार को रवाना होने से पहले कहा था कि वह इस क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं, जो 'सुरक्षा, संपर्क और अवसरों' पर आधारित है। उन्होंने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खतरे से मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए साथी सदस्यों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की।


उज़्बेकिस्तान यात्रा के बाद बिश्केक पहुंचना

मोदी उज्बेकिस्तान की दो दिवसीय यात्रा के बाद बिश्केक पहुंचे हैं। उज्बेकिस्तान की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने और 2030 तक वार्षिक व्यापार को पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया।