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प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित, सज्जनों की संगति का महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में सुभाषितरत्नभाण्डागारम् का एक महत्वपूर्ण श्लोक साझा किया है, जिसमें सज्जनों की संगति का महत्व बताया गया है। उन्होंने ब्रिक्स समिट के संदर्भ में सकारात्मक चर्चा की उम्मीद जताई। इस श्लोक के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि अच्छे लोगों के साथ रहना और बुरे लोगों से दूर रहना चाहिए। जानिए इस सुभाषित का गहरा अर्थ और इसके पीछे की प्रेरणा।
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प्रधानमंत्री मोदी का सुभाषित साझा करना

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सुभाषित संग्रह 'सुभाषितरत्नभाण्डागारम्' का एक महत्वपूर्ण श्लोक साझा किया। इस श्लोक में कहा गया है, "सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्। सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥"


ब्रिक्स समिट की तैयारी

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी ने लिखा, "दुनियाभर के नेता अगले कुछ दिनों में ब्रिक्स समिट के लिए एकत्र होंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि इस सम्मेलन में विश्व कल्याण के उद्देश्य से विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।"


श्लोक का अर्थ और महत्व

इस श्लोक का हिंदी में अर्थ है कि मनुष्य को हमेशा सज्जनों के साथ रहना चाहिए और उन्हीं की संगति करनी चाहिए। सज्जनों के साथ विचार-विमर्श और मित्रता से शांति और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।


यह संस्कृत श्लोक हमें अच्छे लोगों की संगति करने और बुरे लोगों से दूर रहने की प्रेरणा देता है। अच्छे लोगों के साथ रहने से हमारे विचार और आचरण में सकारात्मकता आती है।


सज्जनों के साथ विवाद का महत्व

इस सुभाषित के माध्यम से यह भी कहा गया है कि यदि किसी सज्जन से मतभेद हो जाए, तो भी उससे कुछ सीखने को मिलता है। इसके विपरीत, दुष्ट व्यक्ति के साथ विवाद करने से केवल मानसिक शांति भंग होती है।


दुष्टों की संगति से बचने की सलाह

सुभाषित में यह भी बताया गया है कि दुष्ट लोगों की संगति विनाशकारी होती है। ऐसे लोगों के साथ मित्रता करना तो दूर, उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क भी हानिकारक होता है। इसलिए, ऐसे लोगों से दूर रहने की सलाह दी गई है।