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बच्चों के स्क्रीन टाइम में वृद्धि का कारण: नई अध्ययन से खुलासा

एक नई अध्ययन में यह पता चला है कि बच्चों के स्क्रीन टाइम में वृद्धि का मुख्य कारण माता-पिता का तनाव है। शोध में यह दर्शाया गया है कि तनावग्रस्त माता-पिता बच्चों के स्क्रीन उपयोग पर नियम लागू करने में कम सक्षम होते हैं। इसके अलावा, अध्ययन में यह भी बताया गया है कि माता-पिता को बच्चों के साथ-साथ खुद को भी सहयोग देने की आवश्यकता है। जानें इस अध्ययन के महत्वपूर्ण निष्कर्ष और बच्चों के लिए सही कंटेंट का चयन कैसे करें।
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स्क्रीन टाइम और माता-पिता का तनाव

नई दिल्ली: वर्तमान समय में बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना माता-पिता के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। पढ़ाई, मनोरंजन और कभी-कभी बच्चों को शांत करने के लिए मोबाइल, टीवी और टैबलेट अब परिवार की दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बन चुके हैं। इस संदर्भ में फ्लोरिडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एफआईयू) द्वारा की गई एक नई अध्ययन ने कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं।


एफआईयू के सेंटर फॉर चिल्ड्रन एंड फैमिलीज द्वारा किए गए इस शोध में 4 से 8 साल के बच्चों की देखभाल करने वाले 822 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने यह जानने का प्रयास किया कि माता-पिता का तनाव बच्चों के स्क्रीन उपयोग से किस प्रकार संबंधित है। इस अध्ययन के निष्कर्ष फैमिली रिलेशन्स जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।


अध्ययन में पाया गया कि जिन माता-पिता में भावनात्मक तनाव अधिक था, वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियम लागू करने में कम सक्षम थे। वहीं, जिन माता-पिता को बच्चों के व्यवहार से अधिक परेशानी होती थी, वे कठिन परिस्थितियों में बच्चों को शांत रखने के लिए स्क्रीन का अधिक उपयोग करते थे।


शोध की प्रमुख लेखिका एनिड मोरेरा ने बताया कि इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चों के मीडिया उपयोग से संबंधित निर्णयों पर माता-पिता का तनाव भी प्रभाव डालता है। इसलिए, बच्चों के साथ-साथ माता-पिता को भी समर्थन की आवश्यकता है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि केवल यह कहना कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें, हमेशा व्यावहारिक समाधान नहीं हो सकता। कभी-कभी माता-पिता के लिए स्क्रीन एक कठिन समय को संभालने का आसान तरीका होता है। इस स्थिति में यह देखना आवश्यक है कि बच्चे स्क्रीन पर क्या देख रहे हैं और उसका प्रभाव क्या है।


शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि माता-पिता को बच्चों की उम्र के अनुसार ऐसा कंटेंट चुनना चाहिए जो उन्हें सिखाए, उनकी रुचि बढ़ाए और विकास में मदद करे। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन के कारण बच्चे की नींद, खेलकूद, परिवार के साथ समय या पढ़ाई प्रभावित न हो।


अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स भी परिवारों को सलाह देती है कि वे केवल स्क्रीन के समय की गणना करने के बजाय कंटेंट की गुणवत्ता, दैनिक दिनचर्या और बच्चे के स्वस्थ विकास पर ध्यान दें।


विशेषज्ञों ने '5 सी ऑफ मीडिया यूज' पर ध्यान देने की सलाह दी है। पहला है चाइल्ड, यानी बच्चे की उम्र और उसकी व्यक्तिगत जरूरतों को समझना। दूसरा है कंटेंट, यानी बच्चे के लिए सही और उपयोगी कंटेंट का चयन करना। तीसरा है काम, यानी यह देखना कि बच्चा हर बार परेशान होने पर स्क्रीन पर निर्भर तो नहीं हो रहा। चौथा है क्राउडिंग आउट, यानी स्क्रीन के कारण बच्चे की नींद, खेल-कूद और अन्य गतिविधियों में कमी तो नहीं आ रही। पांचवां है कम्युनिकेशन, यानी बच्चे से टेक्नोलॉजी के उपयोग पर खुलकर बात करना।


शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर किसी कठिन दिन में माता-पिता बच्चे को थोड़ी देर स्क्रीन देते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि उन्होंने कोई बड़ी गलती की। असली जरूरत यह है कि ऐसे उपयोग को सोच-समझकर किया जाए।


सीनियर रिसर्चर शायला ग्रिफिथ के अनुसार, जब माता-पिता के पास आवश्यक संसाधन और सहयोग होता है, तो वे बच्चों के लिए बेहतर सीमाएं निर्धारित कर पाते हैं और उनके साथ सकारात्मक तरीके से जुड़ पाते हैं।