बिहार में जेलों में कैदियों की मौत पर नई मुआवजा नीति लागू
बिहार सरकार की नई मुआवजा नीति
बिहार सरकार ने जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मौतों के मामलों के लिए एक नई मुआवजा नीति को लागू किया है। यह नीति राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद गृह विभाग (कारा) द्वारा जारी की गई है और इसे तुरंत प्रभाव से लागू किया गया है। पहले, ऐसे मामलों में कोई स्थायी व्यवस्था नहीं थी और मुआवजा मानवाधिकार आयोग या अन्य जांच एजेंसियों की सिफारिशों पर निर्भर करता था।
मौत के कारण के अनुसार मुआवजा राशि
नई नीति के अनुसार, यदि किसी कैदी की मौत कारा कर्मियों की यातना या मारपीट के कारण होती है, तो उसके विधिक उत्तराधिकारी को 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, चिकित्सा अधिकारियों या जेल कर्मियों की लापरवाही, कैदियों के बीच विवाद या अन्य अप्राकृतिक कारणों से मौत होने पर 4 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। यदि कोई कैदी आत्महत्या करता है, तो उसके निकटतम स्वजन को 2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
जांच के लिए चार सदस्यीय समिति
मुआवजा देने से पहले हर मामले की जांच के लिए जिला स्तर पर एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता संबंधित जिला पदाधिकारी (डीएम) करेंगे। समिति में एसएसपी या एसपी, सिविल सर्जन सदस्य होंगे, और संबंधित जेल के काराधीक्षक सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट और अनुशंसा जेल महानिरीक्षक (आईजी) को भेजेगी।
30 दिनों में मुआवजा राशि का भुगतान
जेल आईजी की अनुशंसा के बाद गृह विभाग मुआवजे की राशि को स्वीकृत करेगा। स्वीकृति मिलने के बाद, जिला प्रशासन के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत, मृतक कैदी के विधिक उत्तराधिकारी या निकटतम स्वजन के बैंक खाते में 30 दिनों के भीतर मुआवजे की राशि भेजने का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि इस नीति से मुआवजा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनेगी, जिससे प्रभावित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
