बिहार में शराब तस्करी का अनोखा मामला: नकली परिवार का पर्दाफाश
चंपारण में शराब तस्करी का मामला
चंपारण: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में एक शराब तस्करी का मामला सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है। पुलिस के अनुसार, तस्करों ने शराब की खेप को सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए एक नकली परिवार का निर्माण किया था। एक महिला, एक पुरुष और एक बच्चे को एक साथ बैठाकर ऐसा माहौल बनाया गया कि वे सामान्य परिवार की तरह दिखें। लेकिन जब वाहन की तलाशी ली गई, तो सच्चाई सामने आ गई।
सूत्रों के अनुसार, उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से एक लग्जरी कार के माध्यम से बिहार में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर, उत्पाद निरीक्षक शिवेंद्र कुमार के नेतृत्व में कोटवा क्षेत्र में वाहन जांच अभियान चलाया गया। इसी दौरान संदिग्ध लग्जरी कार को रोका गया और उसकी जांच की गई।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस के अनुसार, शुरुआत में कार में बैठी महिला ने जांच का विरोध किया और अधिकारियों पर बेवजह परेशान करने का आरोप लगाया। हालांकि, टीम ने नियमों के अनुसार वाहन की गहन तलाशी जारी रखी। तलाशी के दौरान कार की सीट के नीचे बने एक गुप्त तहखाने से भारी मात्रा में शराब बरामद हुई। इसके बाद कार में सवार महिला, पुरुष और बच्चे को हिरासत में लिया गया।
पूछताछ में खुलासा
पूछताछ के दौरान क्या आया सामने?
पूछताछ के दौरान मिली जानकारी ने अधिकारियों को चौंका दिया। पुलिस का कहना है कि महिला ने बताया कि कार चला रहा व्यक्ति उसका असली पति नहीं था। उसे केवल शराब की तस्करी के लिए 'किराए का पति' बनाया गया था। इसके बदले में उसे हर खेप पर 2,000 रुपये दिए जाते थे। महिला को 1,500 रुपये और साथ मौजूद बच्चे के लिए 500 रुपये तय किए गए थे, ताकि रास्ते में किसी को उन पर शक न हो और वे एक सामान्य परिवार की तरह दिखाई दें।
तस्करी का उद्देश्य
क्या था उनका उद्देश्य?
पुलिस के अनुसार, महिला ने यह भी बताया कि इस नेटवर्क में शामिल लोग विभिन्न स्थानों के निवासी हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें एक साथ लाया जाता था और शराब की खेप पहुंचाने के बाद सभी अपने-अपने स्थानों पर लौट जाते थे। इस बार उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश से शराब लेकर मुजफ्फरपुर पहुंचना था, लेकिन कोटवा में उत्पाद विभाग की टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
