भगवंत मान ने गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के मेले पर दी शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री भगवंत मान का शुभकामना संदेश
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के वार्षिक मेले के अवसर पर देश-विदेश में रहने वाले सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस पवित्र स्थल की आध्यात्मिक धरोहर का उल्लेख करते हुए इसे पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के चरणों से पवित्र भूमि बताया।
श्रद्धालुओं का उत्साह
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा कि पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के चरणों से पवित्र हुए स्थान गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब के वार्षिक मेले के अवसर पर सभी संगत को हार्दिक बधाई। उनके इस पोस्ट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने शुभकामनाएं साझा कीं और इस धार्मिक आयोजन की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए।
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब का महत्व
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब सिख धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यह स्थान पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी की पावन यात्रा और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। हर साल यहां आयोजित होने वाले वार्षिक मेले में पंजाब सहित देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मेले के दौरान विशेष दीवान, कीर्तन, अरदास, गुरबाणी का पाठ और लंगर का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु गुरु घर में माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की अरदास करते हैं।
सामाजिक एकता का प्रतीक
ਧਰਮ ਨਿਰਪੱਖਤਾ, ਬਰਾਬਰਤਾ ਅਤੇ ਆਪਸੀ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਕ, ਸ਼ੇਰ-ਏ-ਪੰਜਾਬ ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਜੀ ਦੀ ਬਰਸੀ 'ਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕੋਟਿ-ਕੋਟਿ ਪ੍ਰਣਾਮ। ਆਓ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਿਆਂਪੂਰਨ ਰਾਜ ਦੀ ਮਹਾਨ ਸੋਚ ਤੋਂ ਸੇਧ ਲਈਏ। pic.twitter.com/C6jDEfAQjQ
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) June 29, 2026
गुरुद्वारा श्री रीठा साहिब का वार्षिक मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समानता और भाईचारे का प्रतीक भी है। इस अवसर पर विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं और सेवादार श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहते हैं। लंगर, चिकित्सा सहायता और अन्य सुविधाओं के माध्यम से सिख परंपरा की सेवा भावना का परिचय मिलता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का संदेश भी इसी भावना को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को गुरु साहिब के बताए मार्ग पर चलने और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा मानव सेवा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। पंजाब सरकार समय-समय पर राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा तीर्थ स्थलों के विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करती रही है।
