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भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने वाला युद्ध अभ्यास 2026

भारत और अमेरिका ने 'युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण शुरू किया है, जिसमें अमेरिकी सेना के आर्कटिक-प्रशिक्षित सैनिक भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात होंगे। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा। अमेरिकी राजदूत और सेना के जनरल ने इस साझेदारी की महत्ता पर जोर दिया है। अभ्यास में एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम का उपयोग भी किया जाएगा, जो इसे ऐतिहासिक बनाता है। जानें इस अभ्यास की विशेषताएँ और उद्देश्य।
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भारत और अमेरिका का संयुक्त युद्ध अभ्यास

भारतीय और अमेरिकी सेनाएं अपनी रक्षा सहयोग को और मजबूत करते हुए 'युद्ध अभ्यास 2026' का 22वां संस्करण आरंभ करने जा रही हैं। हाल ही में जारी जानकारी के अनुसार, इस वर्ष की ट्रेनिंग अलास्का के फोर्ट वेनराइट में तैनात अमेरिकी सेना के 11वें एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-प्रशिक्षित सैनिकों को भारत के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इस अभ्यास में 3rd मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स (3MDTF) की भागीदारी इसे और अधिक प्रभावी बनाएगी, जिसमें एडवांस्ड लॉन्ग-रेंज प्रिसिजन फायर और इंटीग्रेटेड कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम शामिल होंगे। यह संयुक्त अभ्यास 28 सितंबर को समाप्त होगा। जानकारी के अनुसार, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल "जेबी" वोवेल प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेंगे, जो भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की मजबूती को दर्शाता है।


राजदूत और जनरल का बयान

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि यह युद्ध अभ्यास दर्शाता है कि अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी कितनी मजबूत हो चुकी है। उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक एक साथ प्रशिक्षण कर रहे हैं, एक-दूसरे से सीख रहे हैं और ऐसा विश्वास और क्षमताएं विकसित कर रहे हैं जो हमारे दोनों देशों को और सुरक्षित बनाती हैं।" जहां राजदूत ने रणनीतिक संबंधों पर जोर दिया, वहीं जनरल वोवेल ने इस वार्षिक द्विपक्षीय अभ्यास के माध्यम से संयुक्त सेना को मिलने वाली ऑपरेशनल पहुंच और व्यावहारिक तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा, "इस अभ्यास का उद्देश्य विश्वास बनाना, जानकारी साझा करना और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करना है। हर वर्ष भारतीय सेना के साथ हमारी साझेदारी और मजबूत होती जा रही है, और हम मिलकर किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं।


अभ्यास की विशेषताएँ

इस रिलीज़ में बताया गया है कि इस वर्ष के अभ्यास में 'कमांड पोस्ट एक्सरसाइज़' और 'फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज़' शामिल हैं, जो अंततः एक संयुक्त 'लाइव-फायर डेमोंस्ट्रेशन' के साथ समाप्त होंगी। इस इवेंट में अमेरिका और भारत के कई लंबी दूरी और सटीक निशाना लगाने वाले फायर और रॉकेट सिस्टम के डिजिटल इंटीग्रेशन को प्रदर्शित किया जाएगा। 'ऑपरेशन पाथवेज़' के रणनीतिक ढांचे के तहत कार्य करते हुए, यह अभ्यास एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि इसमें भारत में पहली बार एडवांस्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जा रहे हैं।