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भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास में अपाचे हेलीकॉप्टर की भागीदारी

भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच चल रहे युद्धाभ्यास में एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टर की भागीदारी हुई है। राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित इस अभ्यास में सैनिकों ने युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का अभ्यास किया। यह अभ्यास न केवल जमीनी सैनिकों की ट्रेनिंग पर केंद्रित है, बल्कि इसमें हवा और जमीन की ताकत का संयुक्त उपयोग भी शामिल है। जानें इस अभ्यास की विशेषताएँ और इसके महत्व के बारे में।
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संयुक्त सैन्य अभ्यास का विवरण

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच चल रहे युद्धाभ्यास में एएच-64ई अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर शामिल हो गए हैं। इस अभ्यास में भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने मिलकर युद्ध जैसी परिस्थितियों में संयुक्त कार्रवाई का अभ्यास किया, जो राजस्थान की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है।


अभ्यास की योजना और तालमेल

सेना के अनुसार, इस अभ्यास में पहले सैनिकों ने मिलकर मिशन की योजना बनाई। इसके बाद, जमीन पर तैनात सैनिकों और हवा में उड़ रहे अपाचे हेलीकॉप्टर के बीच तालमेल का अभ्यास किया गया। इसका उद्देश्य यह देखना था कि आपात स्थिति में हेलीकॉप्टर और जमीनी सैनिक कितनी तेजी और सटीकता से एक-दूसरे के साथ काम कर सकते हैं। अपाचे की उपस्थिति ने इस अभ्यास को एक नया आयाम दिया। सैनिकों ने हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई को एक साथ जोड़ने का अभ्यास किया।


सैनिकों के लिए प्रशिक्षण का महत्व

यह अभ्यास भारतीय और अमेरिकी सैनिकों के लिए एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। दोनों सेनाएं प्रक्रियाओं, संचार और तालमेल को बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। 2026 में अपाचे की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह अभ्यास केवल जमीनी सैनिकों की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें हवा और जमीन की ताकत का संयुक्त उपयोग भी शामिल है।


फायरिंग अभ्यास का आयोजन

महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में पहले हॉवित्जर और धनुष से फायरिंग की गई थी। पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर का भी उपयोग किया गया। इस दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिकों ने विभिन्न हथियार प्रणालियों के साथ संयुक्त फायरिंग अभ्यास किया। दोनों सेनाओं ने एक-दूसरे की फायरिंग तकनीक और प्रक्रियाओं को समझने का प्रयास किया।


अभ्यास की विशेषताएँ

सेना के अनुसार, अभ्यास में एम 777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर, धनुष तोप और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की गई। इसके अलावा, एल 70 एयर डिफेंस तोपों और एम-लिड्स प्रणालियों का भी उपयोग किया गया। इस संयुक्त प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य फायरिंग की योजना बनाना और समन्वय में बेहतर तालमेल विकसित करना था।


अभ्यास का विस्तार

इसके लिए दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टुकड़ियों ने भी मिलकर प्रशिक्षण लिया। सैनिकों ने लक्ष्य की पहचान की और उस पर कार्रवाई करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। भारत और अमेरिका के बीच यह युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण है, जो उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में हो रहा है। इस अभ्यास में कुल 1,200 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।