भारत का ऊर्जा दृष्टिकोण: विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए आवश्यकताएँ
भारत का ऊर्जा दृष्टिकोण
(गुरदीप सिंह) सिंगापुर, 27 अक्टूबर - केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने विकासशील देशों के लिए भारत के व्यावहारिक दृष्टिकोण को उजागर करते हुए कहा कि औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन और जीवन स्तर में सुधार के लिए ऊर्जा की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोमवार को सिंगापुर में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए केवल उत्पादन में वृद्धि करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वितरण नेटवर्क को मजबूत करना, वितरण प्रक्रिया को कुशल बनाना, ऊर्जा भंडारण में सुधार और संचालन में लचीलापन लाना भी आवश्यक है। नाइक ने कहा, "इस वैश्विक परिदृश्य में भारत का अनुभव एक व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।"
भारत विश्व में बिजली का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, जिसकी कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 560 गीगावाट है, जिसमें से लगभग 308 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है। केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री ने कहा, "उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन, जीवन स्तर में सुधार और आवश्यक सेवाओं के लिए ऊर्जा की उपलब्धता आवश्यक है। हमारी रणनीतियों में विकास से संबंधित प्राथमिकताओं और टिकाऊ एवं मजबूत बिजली व्यवस्था की आवश्यकता के बीच संतुलन होना चाहिए।"
उन्होंने सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्ताह में 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्युतीकरण, कृत्रिम मेधा (एआई), डेटा केंद्रों, इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग, शीतलन की बढ़ती आवश्यकताएँ और शहरीकरण बिजली की मांग को प्रभावित कर रहे हैं।
नाइक ने कहा, "इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार और नई प्रौद्योगिकियों के विकास से बिजली उत्पादन के स्रोतों में भी बदलाव आ रहा है।" उन्होंने पिछले एक दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 55 गुना से अधिक बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है। छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना का भी काफी विस्तार हुआ है, जिसके तहत 63 लाख से अधिक घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 18 गीगावाट से अधिक है।
उन्होंने बताया कि भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल करने का राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले, यानी जून 2025 में पूरा कर लिया था।
नाइक ने कहा, "2035 के लिए एनडीसी में हमारे इस लक्ष्य को बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन हासिल करना है।" उन्होंने कहा, "इस वृद्धि को बनाए रखने के लिए भारत ऊर्जा भंडारण क्षमता को मजबूत कर रहा है। देश में 2032 तक ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता 400 गीगावाट-घंटे से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही बिजली पारेषण, वितरण और डिजिटलीकरण में भी निवेश किया जा रहा है।"
नाइक ने कहा, "हमने सुधारों के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अधिक भागीदारी का रास्ता भी खोला है। इसके साथ ही स्वदेशी क्षमताओं का विकास किया जा रहा है और 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।"
मंत्री ने कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य एक मजबूत बिजली व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया जा सके और भारत की बढ़ती बिजली की मांग को पूरा किया जा सके। नाइक ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा, "हम बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय पारेषण नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं। हरित ऊर्जा गलियारों के विकास में तेजी लाई जा रही है और पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के जरिए बिजली वितरण क्षेत्र को मजबूत किया जा रहा है।"
इस योजना से बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान, प्रौद्योगिकी सहयोग, क्षमता निर्माण और निवेश के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। सिंगापुर के ऊर्जा बाजार प्राधिकरण (ईएमए) द्वारा आयोजित पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन 27 से 30 अक्टूबर, 2026 तक चल रहा है।
