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भारत की मेज़बानी में ब्रिक्स लीडर्स समिट: वैश्विक सहयोग की नई दिशा

भारत एक महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसमें ब्रिक्स समूह के नेता 18वें लीडर्स समिट के लिए नई दिल्ली में एकत्रित होंगे। यह समिट इस समूह की स्थापना के 20 साल पूरे होने का प्रतीक है। चर्चा का मुख्य विषय व्यापार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा। जानें इस सम्मेलन के एजेंडे और प्रमुख मुद्दों के बारे में।
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ब्रिक्स लीडर्स समिट की तैयारी

भारत एक महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक सम्मेलन की मेज़बानी करने जा रहा है, जिसमें ब्रिक्स (BRICS) समूह के नेता 18वें लीडर्स समिट के लिए नई दिल्ली में एकत्रित होंगे। यह समिट इस समूह की स्थापना के 20 साल पूरे होने का प्रतीक है। भारत की अध्यक्षता के चलते, चर्चा का मुख्य विषय व्यापार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, वित्त, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक शासन में सुधार के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा.


सम्मेलन की तारीखें और स्थान

यह दो दिवसीय समिट 12 और 13 सितंबर को प्रगति मैदान के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार के प्रमुख, और आमंत्रित अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी शामिल होंगे.


ब्रिक्स बिज़नेस फोरम और विमेंस बिज़नेस अलायंस

मुख्य नेताओं की बैठक से पहले, 11 सितंबर को ब्रिक्स बिज़नेस फोरम और विमेंस बिज़नेस अलायंस का एक सत्र आयोजित किया जाएगा.


भारत की अध्यक्षता का विषय

भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान देशभर के 25 से अधिक शहरों में ब्रिक्स से संबंधित 350 से ज्यादा बैठकें और उच्च स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए हैं। 2026 के लिए भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय "मज़बूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" है, जो "मानवता सबसे पहले" के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है.


समिट का एजेंडा

समिट का एजेंडा सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने, आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी एकीकरण, स्थायी विकास और संस्थागत शासन में ठोस परिणाम प्राप्त करने पर केंद्रित है. विभिन्न सत्रों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, देशों के बीच भुगतान प्रणाली को जोड़ने, अपनी-अपनी मुद्रा के अधिक उपयोग, MSME के विकास, डिजिटल व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.


अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे

बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, विकास वित्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक का विस्तार और बहुपक्षीय वित्तीय और राजनीतिक संस्थाओं में आवश्यक सुधारों पर भी चर्चा होगी.


समिट के मुख्य आधार

यह समिट तीन मुख्य आधारों पर केंद्रित होगा - राजनीतिक और सुरक्षा मामले, आर्थिक और वित्तीय सहयोग, और सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान. उम्मीद है कि नेताओं का एक साझा घोषणा-पत्र आपसी सहमति से अपनाया जाएगा. इस बड़े कोर ग्रुप में ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं, जिसमें इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होगा.