भारत की मेज़बानी में होगा पहला एससीओ सभ्यता संवाद मंच
भारत की एससीओ सभ्यता संवाद मंच की मेज़बानी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि भारत इस वर्ष के अंत तक पहले ‘शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सभ्यता संवाद मंच’ का आयोजन करेगा। उन्होंने सभी सदस्य देशों को इस मंच में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। यह घोषणा सिंह ने ताजिकिस्तान के दुशान्बे में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की बैठक के दौरान की।
पिछले वर्ष तियानजिन में आयोजित एससीओ राष्ट्राध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन सभ्यताओं, कला, साहित्य और परंपराओं की विरासत को वैश्विक स्तर पर साझा करने के लिए एक ‘सभ्यता संवाद मंच’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। सिंह ने एससीओ की 25 साल की यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘बिश्केक में आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन में, हमारे नेताओं ने इस संगठन की 25 साल की यात्रा पर चर्चा की।
यह अवसर न केवल हमारी साझा यात्रा की समीक्षा करने का था, बल्कि भविष्य की दिशा पर विचार करने का भी था।’’ बिश्केक में, प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ के लिए सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों के प्रति भारत के दृष्टिकोण को दोहराया। उन्होंने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि इन तीन स्तंभों को केवल एक सोच तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इन्हें ठोस परिणामों में बदला जाए। इसके लिए सबसे पहली और आवश्यक शर्त शांति एवं सुरक्षा है।’’
उन्होंने यह भी कहा कि एससीओ का सहयोग सीधे लोगों तक पहुंचना चाहिए।
दुशान्बे में, रक्षा मंत्री सिंह ने यह भी बताया कि ‘इंटरनेशनल सोलर एलायंस’ और ‘कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर’ जैसी भारत की वैश्विक पहलों का उद्देश्य किफायती स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु-अनुकूल विकास में योगदान देना है। उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ टिकाऊ जीवनशैली और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देता है, जबकि ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’ स्वच्छ और अधिक टिकाऊ ऊर्जा समाधानों को प्रोत्साहित करता है। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों ने एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक के संयुक्त संदेश को स्वीकार किया, जिसमें 2027 के लिए एससीओ का बजट, वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय, तथा 2026-2030 के लिए पीएमटीईसी कार्ययोजना शामिल हैं।
एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद एक महत्वपूर्ण तंत्र है, जो सदस्य देशों के बीच आर्थिक और अन्य व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार है। भारत 2017 से एससीओ का पूर्ण सदस्य है और इसके विभिन्न तंत्रों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है। एससीओ बैठक से इतर, सिंह ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोहिर रसूलजादा से मुलाकात की और भारत तथा ताजिकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों और लोगों के बीच गहरे जुड़ाव पर जोर दिया।
उन्होंने दुशान्बे में एससीओ बैठक के दौरान ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ़ से भी मुलाकात की।
